कन्हैया कुमार और उमर खालिद की पीएचडी सस्पेंड

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जयपुर। फरवरी 2016  में जवाहर लाल नेहरू  विश्वविद्यालय कैंपस देश विरोधी नारे लगाने के मामले में फंसे पूर्व छात्रसंघ अध्यक्ष कन्हैया कुमार व उमर खालिद की पीएचडी सस्पेंड कर दी गई है।

इस मामले में फंसे तीसरे आरोपी अनिर्बन ने अपनी पीएचडी 2017 में ही पूरी कर ली थी जिसके बाद उन्होंने कैम्पस छोड़ दिया। इसलिए विश्वविद्यालय प्रशासन ने सिर्फ कन्हैया कुमार व उमर खालिद पर कार्यवाही करते हुए ये निर्णय लिया है।

बताया जा रहा है इस मामले की जाँच के लिए बनी 5 सदस्यों की उच्चस्तरीय कमेटी ने 11 अप्रैल 2016 को अपनी रिपोर्ट पेश की थी। जिसमे कन्हैया कुमार, उमर खालिद और अनिर्बन को दो-दो सेमेस्टर निलंबित करने की सिफारिश की गई थी। बताया जा रहा है की उस रिपोर्ट को मानते हुए विश्वविद्यालय प्रशासन ने ये निर्णय लिया है, जिसके बाद दोनों की पीएचडी डिग्री सस्पेंड हो गई है। आपको बता दे की कन्हैया कुमार पीएचडी के चोथे वर्ष के छात्र है। जबकि खालिद को एक साल का एक्सटेंशन मिला हुआ है।

आपको मालूम हो कि कन्हैया कुमार को इस मामले में जेल भी जाना पड़ा था। 2016 में इस मामले के वक्त कन्हैया जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय के छात्रसंघ के अध्यक्ष थे उनके जेल जाने के बाद देश की राजनीति में एक विरोधी की आवाज बनकर उभरे थे। इस मामले के बाद कन्हैया कुमार को मीडिया में जगह मिलने लगी थी और वो कई मौके पर मोदी सरकार के खिलाफ अपनी आवाज उठाते रहे। कन्हैया वामपंथी विचार धारा से जुड़े हुए है और बिहार के एक गरीब किसान के बेटे है। वे जवाहर लाल नेहरू  विश्वविद्यालय में इंटरनेशनल अफेयर विथ साउथ अफ्रीका पर अपनी पीएचडी कर रहे है।

 

 

 

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