कमल नाथ और नकुल नाथ का छिंदवाड़ा दौरा मंगलवार से

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मध्यप्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष कमल नाथ व उनके पुत्र व छिंदवाड़ा के सांसद नकुल नाथ मंगलवार को तीन दिवसीय दौरे पर छिंदवाड़ा पहुंच रहे हैं। छिंदवाड़ा को कोरोना संक्रमण के चलते ऑरेंज जोन में था, मगर अब ग्रीन जोन में आ गया है। सांसद कार्यालय से रविवार को दी गई जानकारी के अनुसार, कमल नाथ एवं नकुलनाथ का 26 मई को छिंदवाड़ा आगमन होगा तथा वे 27 मई को छिंदवाड़ा निवास के बाद 28 मई को छिंदवाड़ा से रवाना होंगे।

बताया गया है कि लगभग 60 दिनों के लंबे लॉकडाउन के बाद भी कमल नाथ एवं नकुल नाथ का छिंदवाड़ा के आम नागरिकों सहित संगठन के कार्यकर्ता एवं प्रशासनिक अधिकारियों से निरंतर संपर्क बना रहा। जिले की प्रत्येक गतिविधियों की जानकारी रखते हुए उन्होंने समय-समय पर उचित मार्गदर्शन, आर्थिक सहयोग व जन सामान्य को कोरोना से जंग लड़ने और लड़कर जीतने के लिए प्रोत्साहित किया।

न्यूज स्त्रोत आईएएनएस

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बहुत ही मुश्किल है अपने बारे में लिखना । इसलिए ज्यादा कुछ नहीं, मैं बहुत ही सरल व्यतित्व का व्यक्ति हूं । खुशमिजाज हूं ए इसलिए चेहरे पर हमेशा खुशी रहती हैए और मुझे अकेला रहना ज्यादा पंसद है। मेरा स्वभाव है कि मेरी बजह से किसी का कोई नुकसान नहीं होना चाहिए और ना ही किसी का दिल दुखना चाहिए। चाहे वो व्यक्ति अच्छा हो या बुरा। मेरे इस स्वभाव के कारण कभी कभी मुझे खामियाजा भी भुगतान पड़ता है। मैं अक्सर उनके बारे में सोचकर भुला देता हूं क्योंकि खुश रहने का हुनर सिर्फ मेरे पास है। मेरी अपनी विचारए विचारधारा है जिसे में अभिव्यक्त करता रहता हूं । जिन लोगों के विचारों से कभी प्रभावित भी होता हूं तो उन्हें फोलो कर लेता हूं । अभी सफर की शुरुआत है मैने कंप्यूटर ऑफ माटर्स की डिग्री हासिल की है और इस मीडीया क्षेत्र में अभी नया हूं। मगर मुझे अब इस क्षेत्र में काम करना अच्छा लग रहा है। और फिर इसी में काम करने का मन बना लेना दूसरों के लिये अश्चर्य पूर्ण होगा। लेकिन इससे पहले और आज भी ब्लागर ने एक मंच दिया चिठ्ठा के रुप में, जहां बिना रोक टोक के आसानी से सबकुछ लिखा या बताया जा सका। कभी कभी मन में उठ रही बातों या भावों को शब्दों में पिरोयाए उनमें खुद की और दूसरों की कहानी कही। कभी उनके द्वारा किसी को पुकाराए तो कभी खुद ही रूठ गया। कई बार लिखने पर भी मन सतुष्ट नहीं हुआ और निरंतर कुछ नया लिखने मन बनता रहता है। अजीब सी बेचैनी जो न जाने क्या करवाएगी और कितना कुछ कर गुजर जाने की तमन्ना लिए निकले हैं इन सफरों, जहां उम्मीद और विश्वास दोनों कायम हैं जो अर्जुन के भांति लक्ष्य को भेद देंगे । मुझे अभी अपने जीवन में बहुत कुछ करना है किसी के सपनों को पूरा करना हैं । अब तो बस मेरा एक ही लक्ष्य हैं कि मैं बस उसके सपने पूरें करू।

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