धार्मिक एकता के प्रतीक थे संत कबीरदास, कल मनाई जाएगी जयंती

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संत कबीर दास एक महान कवि थे।र हर साल ज्येष्ठ पूर्णिम के दिन उनकी जयंती मनाई जाती हैं इस बार यह तिथि 5 जून को पड़ रही हैं ऐसा माना जाता हैं संवत 1455 की इस पूर्णिमा को उनका जन्म हुआ था। भक्ति काल के उस दौर में कबीरदास जी ने अपना पूरा जीवन समाज सुधार में लगा दिया। कबीरपंथी इन्हें एक अलौकिक अवतारी पुरुष मानते हैं। कबीर उनके आराध्य हैं ऐसा माना जाता हैं कि कबीर दास जी का जन्म सन् 1398 ई के आसपास लहरतारा ताल, काशी के समक्ष हुआ था। उनके जन्म के विषय में भी अलग अलग मत हैं। तो आज हम आपको संत कबीरदास जी से जुड़ी कुछ खास और महत्वपूर्ण बातें बताने जा रहे हैं तो आइए जानते हैं।

कुछ लोग कबीर दास जी को हिंदू मानते हैं तो कुछ लोग कहते हैं कि उनका जन्म एक मुस्लिम परिवार में हुआ था। उनके जन्म को लेकर ऐसा भी वर्णन हैं कि वे रामानंद स्वामी के आशीर्वाद से काशी की एक ब्राह्मणी के गर्भ से जन्मे थे, जो एक विधवा थी। कबीरदास जी की माता को भूल से रामानंद स्वामी ने पुत्रवती होने का आशीर्वाद दे दिया था। एक अन्य मतानुसार यह भी कहा जाता हैं कि कबीर जनम से ही मुसलमान थे और बाद में उन्हें अपने गुरु रामानंद से हिंदू धर्म का ज्ञान प्राप्त हुआ। संत कबीरदास जी देशाटन करते थे और सदैव साधु संतों की संगति में रहते थे। संत कबीर दास निर्गुण ब्रह्म के उपासक थे। वे एक ही ईश्वर को मानते थे। वे अंध विश्वास, धर्म व पूजा के नाम पर होने वाले आडंबरों के विरोधी थे।

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