Kaal bhairav jayanti: 7 दिसंबर को कालभैरव जयंती, जानिए इनकी पूजा से होने वाले लाभ

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हिंदू धर्म में व्रत त्योहारों को विशेष स्थान प्राप्त हैं वही धर्म ग्रंथों के मुताबिक कालभैरव बाबा का जन्म मार्गशीर्ष मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को हुआ था। इस साल यह तिथि 7 दिसंबर को पड़ रही हैं इ दिन मध्याह्न में शिव के अंश से भैरव देव की उत्पत्ति हुई थी। जिन्हें शिव का पांचवा अवतार कहा जाता हैं

भैरव का मतलब होता हैं भय को हर के जगत की रक्षा करने वाला हैं मान्यता है कि भैरव शब्द के तीन अक्षरों में ब्रह्मा, विष्णु और महेश तीनों की शक्ति समाहित हैं भैरव बाबा शिव के गण और देवी मां पार्वती के अनुचर माने जाते हैं तो आज हम आपको इनकी पूजा आराधना से मिलने वाले लाभ बताने जा रहे हैं तो आइए जानते हैं।

आपको बता दें कि देवताओं में भैरव देव को बहुत ही महत्व हैं इन्हें काशी के कोतवाल कहते हैं इनकी शक्ति का नाम हैं भैरवी गिरिजा जो अपने भक्तों की अभीष्ट दायिनी हैं इस दिन इनके दो रूप हैं पहला बटुक भैरव जो भक्तों को अभय देने वाले सौम्य रूप में प्रसिद्ध हैं वही काल भैरव अपराधिक प्रवृतियों पर नियंत्रण करने वाले भयंकर दंडनायक माने जाते हैं। भैरव बाबा की पूजा आराधना से घर में नकारात्मक शक्तियां, जादू टोने और भूत प्रेत आदि दूर हो जाते हैं। इनका भय नहीं रहता हैं बल्कि इनकी उपासना से जातक का आत्मविश्वास बढ़ जाता हैं।

कालभैरव जयंती वाले दिन शिव के अंश काल भैरव की पूजा करने से विशेष फल की प्राप्ति होती हैं कालाष्टमी क दिन सुबह उठकर कालभैरव बाबा की पूरे विधि विधान से पूजा करनी चाहिए।

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