कालभैरव अष्टमी 2019: कल है कालभैरव अष्टमी, जानिए पूजन विधि और महत्व

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हिंदू धर्म में कालभैरव अष्टमी को बहुत ही खास महत्व दिया जाता हैं। वही शिव की तंत्र साधना में भैरव का विशेष महत्व होता हैं। काल भैरव वैसे तो ​भगवान शिव के ही रौद्र रूप माने जाते हैं। मगर कही कही पर इनको शिव का पुत्र भी कहा जाता हैं। वही कही पर ये भी माना जाता हैं। कि जो कोई भी शिव के मार्ग पर चलता हैं उसे भैरव कहा जाता हैं।

इनकी उपासना और आराधना से भय और अवसाद का नाश हो जाता हैं। वही इससे मनुष्य को अदम्य साहस प्राप्त होता हैं। शनि और राहु की बाधाओं से मुक्ति पाने के लिए भगवान भैरव की पूजा अचूक मानी जाती हैं। मार्गशीर्ष मास में ​भैरव की विशेष पूजा उपासना कालाष्टमी पर की जाती हैं। जानिए काल भैरव के अलग अलग स्वरूपों की विशेषता—
बता दें कि भैरव के तमाम स्वरूप बताए गए हैं, असितांग भैरव, रूद्र भैरव, बटुक भैरव और काल भैरव आदि। मुख्यत बटुक भैरव और काल भैरव स्वरूप की आराधना और ध्यान सर्वोत्तम माना जाता हैं। बटुक भैरव भगवान का बाल रूप हैं इन्हें आनंद भैरव भी कहा जाता हैं।

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इस सौम्य स्वरूप की पूजा शीघ्र फलदायी मानी जाती हैं। काल भैरव इनका साहसिक युवा रूप माना जाता हैं। इनकी आराधना से शत्रु से मुक्ति, संकट, कोर्ट कचहरी के मुकदमों में विजय की प्राप्ति होती हैं। असितांग भैरव और रूद्र भैरव की उपासना अति विशेष मानी जाती हैं जो मुक्ति मोक्ष और कुंडलिनी जागरण के दौरान प्रयोग की जाती हैं। वही संध्याकाल में भैरव की पूजा करना विशेष माना जाता हैं इनके सामने एक बड़े दीपक में सरसों के तेल का दीपक अवश्य ही जलाना चाहिए।

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