मंगलवार को है काल भैरव जन्माष्टमी, इन चीजों से करें भैरव को प्रसन्न

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काल भैरव अपने भक्तों पर शत्रुओं पर विजय प्राप्त करने व घर से नकारात्मक शक्तियां दूर करने में सदैव कृपा करते हैं। मंगलवार 19 नबंबर को काल भैरव अष्टमी है, इस दिन काल भैरव की पूजा अर्चना कर उपसना करने भक्तों की मनोकामना पुरी होती है व शत्रुओं का नाश होता है। हिन्दुओं में भैरव को भगवान शिव का हीी अवतार माना गया है। भैरव अपने भक्तों को सभी संकटों से दुर रखते है।
जानीए पूजा का शुभ मूहुर्त एवं किस चीज का प्रसाद चढाने से भैरव प्रसन्न होते हैं –
19 नवंबर मंगलवार को शाम 3.35 बजे से भैरव अष्टमी शुरू होगी व 20 नवंबर दोपहर 1.41 बजे समाप्त होगी।
अष्टमी के दिन काल भैरव को काली उडद से बनी चीजों का भोग लगाना चाहिए। इस दिन सरसों के तेल में बने उडद की दाल के बडे, गुलगुले, कचैडी आदि का प्रसाद चढाने से भैरव प्रसन्न होते है।
काल भैरव को प्रसन्न करनें के लिए पूजा करते समय इस मंत्र का जाप करना चाहिए
अतिक्रूर महाकाय कल्पान्त दहनोपम्ए
भैरव नमस्तुभ्यं अनुज्ञा दातुमर्हसि!!


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बहुत ही मुश्किल है अपने बारे में लिखना । इसलिए ज्यादा कुछ नहीं, मैं बहुत ही सरल व्यतित्व का व्यक्ति हूं । खुशमिजाज हूं ए इसलिए चेहरे पर हमेशा खुशी रहती हैए और मुझे अकेला रहना ज्यादा पंसद है। मेरा स्वभाव है कि मेरी बजह से किसी का कोई नुकसान नहीं होना चाहिए और ना ही किसी का दिल दुखना चाहिए। चाहे वो व्यक्ति अच्छा हो या बुरा। मेरे इस स्वभाव के कारण कभी कभी मुझे खामियाजा भी भुगतान पड़ता है। मैं अक्सर उनके बारे में सोचकर भुला देता हूं क्योंकि खुश रहने का हुनर सिर्फ मेरे पास है। मेरी अपनी विचारए विचारधारा है जिसे में अभिव्यक्त करता रहता हूं । जिन लोगों के विचारों से कभी प्रभावित भी होता हूं तो उन्हें फोलो कर लेता हूं । अभी सफर की शुरुआत है मैने कंप्यूटर ऑफ माटर्स की डिग्री हासिल की है और इस मीडीया क्षेत्र में अभी नया हूं। मगर मुझे अब इस क्षेत्र में काम करना अच्छा लग रहा है। और फिर इसी में काम करने का मन बना लेना दूसरों के लिये अश्चर्य पूर्ण होगा। लेकिन इससे पहले और आज भी ब्लागर ने एक मंच दिया चिठ्ठा के रुप में, जहां बिना रोक टोक के आसानी से सबकुछ लिखा या बताया जा सका। कभी कभी मन में उठ रही बातों या भावों को शब्दों में पिरोयाए उनमें खुद की और दूसरों की कहानी कही। कभी उनके द्वारा किसी को पुकाराए तो कभी खुद ही रूठ गया। कई बार लिखने पर भी मन सतुष्ट नहीं हुआ और निरंतर कुछ नया लिखने मन बनता रहता है। अजीब सी बेचैनी जो न जाने क्या करवाएगी और कितना कुछ कर गुजर जाने की तमन्ना लिए निकले हैं इन सफरों, जहां उम्मीद और विश्वास दोनों कायम हैं जो अर्जुन के भांति लक्ष्य को भेद देंगे । मुझे अभी अपने जीवन में बहुत कुछ करना है किसी के सपनों को पूरा करना हैं । अब तो बस मेरा एक ही लक्ष्य हैं कि मैं बस उसके सपने पूरें करू।

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