ज्योतिरादित्य सिंधिया ने कहा, आदिवासी बिकाऊ नहीं

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कांग्रेस सांसद व मध्य प्रदेश चुनाव अभियान समिति के अध्यक्ष ज्योतिरादित्य सिंधिया ने आदिवासियों के बीच पहुंचकर राज्य के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान पर करारा हमला बोलते हुए कहा कि चौहान आदिवासियों को खरीदने की कोशिश कर चुके हैं, लेकिन उन्हें यह नहीं पता कि आदिवासी बिकाऊ नहीं हैं। आदिवासियों के बीच आयोजित जनसभाओं में सिंधिया ने राज्य सरकार की जनविरोधी नीतियों को लेकर जमकर हमला बोला।

सिंधिया ने कहा,”शिवराज सरकार आदिवासियों को जूते-चप्पल के जरिए गंभीर बीमारी उपहार में दे रही है, वहीं कई स्थानों पर आदिवासी महिलाओं को साड़ियां बांटकर वापस ले ली।”

सिंधिया ने कहा,”राज्य सरकार का नेतृत्व करने वाला ही बेहरूपिया है, कोलारस और मुंगावली के विधानसभा के उपचुनाव में आदिवासी महिलाओं को एक-एक हजार रुपये मासिक देने का ऐलान किया था, मगर उसके बावजूद वहां से कांग्रेस के प्रत्याशी जीते, क्योंकि आदिवासी स्वाभिमानी और आत्मसम्मान वाला है। चुनाव होने के बाद किसी भी परिवार को एक हजार रुपये नहीं मिले। यह सरकार और मुख्यमंत्री सिर्फ घोषणा करते हैं, इसलिए मुख्यमंत्री को घोषणावीर कहा जाता है।”

सिंधिया ने आगे कहा कि राज्य में कांग्रेस की सरकार बनी तो वह काम अर्जी के आधार पर नहीं बल्कि जनता की मर्जी से काम करेगी। वह सरकार सभी वगरें के कल्याण के लिए काम करेगी। आदिवासियों की जिंदगी में कांग्रेस ने सदा बदलाव लाया है, यह क्रम आगे भी जारी रहेगा।

संधिया ने मुख्यमंत्री पर आरोप लगाते हुए कहा,”बीते 14 साल से वे सत्ता में हैं, इस दौरान उन्होंने खुद को मालामाल कर लिया है, मगर जनता को बेहाल कर दिया है। इस सरकार को सबसे अधिक प्यार अघर किसी से है, तो वह रेत है। यही कारण है कि प्रदेश की सारी नदियों केा खोदकर रख दिया गया है।”

राज्य के व्यापमं घोटाले की चर्चा करते हुए सिंधिया ने कहा कि व्यापमं के असली दोषी मौज कर रहे हैं और निर्दोष बच्चे जेलों में हैं। युवाओं को रोजगार नहीं मिल रहा है, लायक बच्चा नौकरी को परेशान है और अमीर बाप का नालायक बच्चा नौकरी पा रहा है। इसके अलावा भी राज्य में लगातार घोटाले हो रहे हैं।

न्यूज स्त्रोत आईएएनएस


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बहुत ही मुश्किल है अपने बारे में लिखना । इसलिए ज्यादा कुछ नहीं, मैं बहुत ही सरल व्यतित्व का व्यक्ति हूं । खुशमिजाज हूं ए इसलिए चेहरे पर हमेशा खुशी रहती हैए और मुझे अकेला रहना ज्यादा पंसद है। मेरा स्वभाव है कि मेरी बजह से किसी का कोई नुकसान नहीं होना चाहिए और ना ही किसी का दिल दुखना चाहिए। चाहे वो व्यक्ति अच्छा हो या बुरा। मेरे इस स्वभाव के कारण कभी कभी मुझे खामियाजा भी भुगतान पड़ता है। मैं अक्सर उनके बारे में सोचकर भुला देता हूं क्योंकि खुश रहने का हुनर सिर्फ मेरे पास है। मेरी अपनी विचारए विचारधारा है जिसे में अभिव्यक्त करता रहता हूं । जिन लोगों के विचारों से कभी प्रभावित भी होता हूं तो उन्हें फोलो कर लेता हूं । अभी सफर की शुरुआत है मैने कंप्यूटर ऑफ माटर्स की डिग्री हासिल की है और इस मीडीया क्षेत्र में अभी नया हूं। मगर मुझे अब इस क्षेत्र में काम करना अच्छा लग रहा है। और फिर इसी में काम करने का मन बना लेना दूसरों के लिये अश्चर्य पूर्ण होगा। लेकिन इससे पहले और आज भी ब्लागर ने एक मंच दिया चिठ्ठा के रुप में, जहां बिना रोक टोक के आसानी से सबकुछ लिखा या बताया जा सका। कभी कभी मन में उठ रही बातों या भावों को शब्दों में पिरोयाए उनमें खुद की और दूसरों की कहानी कही। कभी उनके द्वारा किसी को पुकाराए तो कभी खुद ही रूठ गया। कई बार लिखने पर भी मन सतुष्ट नहीं हुआ और निरंतर कुछ नया लिखने मन बनता रहता है। अजीब सी बेचैनी जो न जाने क्या करवाएगी और कितना कुछ कर गुजर जाने की तमन्ना लिए निकले हैं इन सफरों, जहां उम्मीद और विश्वास दोनों कायम हैं जो अर्जुन के भांति लक्ष्य को भेद देंगे । मुझे अभी अपने जीवन में बहुत कुछ करना है किसी के सपनों को पूरा करना हैं । अब तो बस मेरा एक ही लक्ष्य हैं कि मैं बस उसके सपने पूरें करू।

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