ज्येष्ठ पूर्णिमा पर सुहाग की लम्बी उम्र की कामना के लिए इस विधि से करें वट वृक्ष की पूजा

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जयपुर। ज्येष्ठ पूर्णिमा को कई स्थानों में वट पूर्णिमा के नाम से भी जाना जाता है। इस दिन सुहागण स्त्री वट वृक्ष की पूजा अर्चना करती है व सुहाग की लम्बी उम्र की कामना करती है। वट पूर्णिमा या ज्येष्ठ पूर्णिमा का पर्व 16 जून के दिन मनाया जाएगा।

वट पूर्णिमा का महत्व ज्यादातर गुजरात, महाराष्ट्र और दक्षिण भारत में है, यहां पर इस दिन वट सावित्री का व्रत किया जाता है। उत्तर भारत में इस व्रत को ज्येष्ठ पूर्णिमा के नाम से जाना जाता है। यहां पर इस व्रत में स्नान और दान को विशेष महत्व माना गया है। आज हम इस लेख में ज्येष्ठ पूर्णिमा की तिथि, शुभ मुहूर्त , ज्येष्ठ पूर्णिमा का महत्व इन सब के बारे में बता रहें हैं।

ज्येष्ठ पूर्णिमा इस साल 16 जून 2019 को मनाया जाएगा। ज्येष्ठ पूर्णिमा का शुभ मुहूर्त 09:31 बजे से शुरु होगा। इसके साथ ही  ज्येष्ठ पूर्णिमा तिथि की समाप्ति 17 जून 09:30 बजे होगी।

ज्येष्ठ पूर्णिमा को शास्त्रों में बहुत महत्व दिया जाता है। ज्येष्ठ पूर्णिमा में पानी पिलाना सबसे शुभ कर्म माना जाता है। इस माह में पानी के प्याऊ जगह जगह लगा कर लोगो की प्यास बुझाई जाती है। ज्येष्ठ पूर्णिमा के दिन सुबह स्नान कर सुहागन स्त्रियां सोलह श्रृंगार करके वट वृक्ष की पूजा करती है।

ज्येष्ठ पूर्णिमा के दिन एक बांस की टोकरी में सात प्रकार के अनाज को कपड़ो से ढंक कर रखें। इसके साथ ही  दूसरी टोकरी में माँ सावित्री की प्रतिमा रखें जिसमें धूप, दीप, अक्षत, कुमकुम, मौली आदि पूजा सामग्री भी रख कर सुहागन स्त्रियां वट सावित्री की कथा पढ़ कर वट वृक्ष के सात चक्कर लगाते हुए  मौली का धागा वट वृक्ष पर बांधाती है, व पति की लम्बी उम्र की कामना करती है।

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