‘वाडा चेन्नई’ की जर्नी 2003 में शुरू हुई थी : धनुष

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तमिल गैंगस्टर फिल्म ‘वाडा चेन्नई’ की रिलीज का इंतजार कर रहे अभिनेता-फिल्मकार धनुष का कहना है कि फिल्म की जर्नी 2003 में शुरू हुई थी और वह इस प्रोजेक्ट का हिस्सा बन खुद को खुदकिस्मत मान रहे हैं। राष्ट्रीय पुरस्कार विजेता फिल्म निर्माता वेत्रिमारन द्वारा निर्देशित ‘वाडा चेन्नई’ 17 अक्टूबर को रिलीज होगी।

फिल्म में उत्तरी चेन्नई के गैंगस्टर के जीवन के 30 सालों को दिखाया गया है।

धनुष ने संवाददाताओं से कहा, “‘वाडा चेन्नई’ की जर्नी 2003 में शुरू हुई थी। यह वेत्री और मेरे ‘पोलातवन’ करने से भी पहले शुरू हुई। हम ‘पोलातवन’ के बाद दोबारा साथ में काम शुरू करना चाहते थे और मैंने उन्हें सुझाया कि ‘वाडा चेन्नई’ करते हैं। वेत्री समझते थे कि न तो हमारे पास इसके लिए मार्किट है और न ही इस तरह की फिल्म बनाने के लिए बजट। इसके बजाए हमने ‘अदुकालम’ में साथ काम किया।”

न्यज स्त्रोत आईएएनएस


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बहुत ही मुश्किल है अपने बारे में लिखना । इसलिए ज्यादा कुछ नहीं, मैं बहुत ही सरल व्यतित्व का व्यक्ति हूं । खुशमिजाज हूं ए इसलिए चेहरे पर हमेशा खुशी रहती हैए और मुझे अकेला रहना ज्यादा पंसद है। मेरा स्वभाव है कि मेरी बजह से किसी का कोई नुकसान नहीं होना चाहिए और ना ही किसी का दिल दुखना चाहिए। चाहे वो व्यक्ति अच्छा हो या बुरा। मेरे इस स्वभाव के कारण कभी कभी मुझे खामियाजा भी भुगतान पड़ता है। मैं अक्सर उनके बारे में सोचकर भुला देता हूं क्योंकि खुश रहने का हुनर सिर्फ मेरे पास है। मेरी अपनी विचारए विचारधारा है जिसे में अभिव्यक्त करता रहता हूं । जिन लोगों के विचारों से कभी प्रभावित भी होता हूं तो उन्हें फोलो कर लेता हूं । अभी सफर की शुरुआत है मैने कंप्यूटर ऑफ माटर्स की डिग्री हासिल की है और इस मीडीया क्षेत्र में अभी नया हूं। मगर मुझे अब इस क्षेत्र में काम करना अच्छा लग रहा है। और फिर इसी में काम करने का मन बना लेना दूसरों के लिये अश्चर्य पूर्ण होगा। लेकिन इससे पहले और आज भी ब्लागर ने एक मंच दिया चिठ्ठा के रुप में, जहां बिना रोक टोक के आसानी से सबकुछ लिखा या बताया जा सका। कभी कभी मन में उठ रही बातों या भावों को शब्दों में पिरोयाए उनमें खुद की और दूसरों की कहानी कही। कभी उनके द्वारा किसी को पुकाराए तो कभी खुद ही रूठ गया। कई बार लिखने पर भी मन सतुष्ट नहीं हुआ और निरंतर कुछ नया लिखने मन बनता रहता है। अजीब सी बेचैनी जो न जाने क्या करवाएगी और कितना कुछ कर गुजर जाने की तमन्ना लिए निकले हैं इन सफरों, जहां उम्मीद और विश्वास दोनों कायम हैं जो अर्जुन के भांति लक्ष्य को भेद देंगे । मुझे अभी अपने जीवन में बहुत कुछ करना है किसी के सपनों को पूरा करना हैं । अब तो बस मेरा एक ही लक्ष्य हैं कि मैं बस उसके सपने पूरें करू।

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