जॉन टेरी एस्टन विला के सहायक कोच नियुक्त

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इंग्लैंड के महान फुटबाल खिलाड़ी जॉन टेरी को गुरुवार को इंग्लिश क्लब एस्टन विला का सहायक कोच नियुक्त किया गया। चेल्सी के लिए लंबे समय तक इंग्लिश प्रीमियर लीग (ईपीएल) में खेल चुके टेरी क्लब के मुख्य कोच डीन स्मिथ के साथ काम करेंगे। जीसस गार्सिया पिटार्क को खेल निदेशक नियुक्त किया गया है।

समाचार एजेंसी एफे के अनुसार, स्मिथ इससे पहले ब्रेटफोर्ड के कोच थे और वह स्टीव ब्रूस की जगह लेंगे जिन्हें इस महीने की शुरुआत में बर्खास्त कर दिया गया था।

विला के मुख्य कार्यकारी अधिकारी क्रिस्टियन पुर्सलो ने कहा, “यह तीन नियुक्तियां एस्टन विला के इतिहास में एक नए युग की शुरुआत है और हम गहन शोध के बाद इन लोगों का चयन करके खुश हैं।”

क्रिस्टियन ने कहा, “डीन के पास के साफ और सफल कोचिंग फिलॉशफी है और उन्हें एस्टन विला फुटबाल क्लब के बारे में भी जानकारी है। वह चैम्पियनशिप के बार में भी जानते हैं।”

विला की टीम फिलहाल इंग्लैंड के दूसरे स्तर की फुटबाल लीग में खेल रही है जिसे चैम्पियनशिप के नाम से जाना जाता है।

न्यूज स्त्रोत आईएएनएस


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बहुत ही मुश्किल है अपने बारे में लिखना । इसलिए ज्यादा कुछ नहीं, मैं बहुत ही सरल व्यतित्व का व्यक्ति हूं । खुशमिजाज हूं ए इसलिए चेहरे पर हमेशा खुशी रहती हैए और मुझे अकेला रहना ज्यादा पंसद है। मेरा स्वभाव है कि मेरी बजह से किसी का कोई नुकसान नहीं होना चाहिए और ना ही किसी का दिल दुखना चाहिए। चाहे वो व्यक्ति अच्छा हो या बुरा। मेरे इस स्वभाव के कारण कभी कभी मुझे खामियाजा भी भुगतान पड़ता है। मैं अक्सर उनके बारे में सोचकर भुला देता हूं क्योंकि खुश रहने का हुनर सिर्फ मेरे पास है। मेरी अपनी विचारए विचारधारा है जिसे में अभिव्यक्त करता रहता हूं । जिन लोगों के विचारों से कभी प्रभावित भी होता हूं तो उन्हें फोलो कर लेता हूं । अभी सफर की शुरुआत है मैने कंप्यूटर ऑफ माटर्स की डिग्री हासिल की है और इस मीडीया क्षेत्र में अभी नया हूं। मगर मुझे अब इस क्षेत्र में काम करना अच्छा लग रहा है। और फिर इसी में काम करने का मन बना लेना दूसरों के लिये अश्चर्य पूर्ण होगा। लेकिन इससे पहले और आज भी ब्लागर ने एक मंच दिया चिठ्ठा के रुप में, जहां बिना रोक टोक के आसानी से सबकुछ लिखा या बताया जा सका। कभी कभी मन में उठ रही बातों या भावों को शब्दों में पिरोयाए उनमें खुद की और दूसरों की कहानी कही। कभी उनके द्वारा किसी को पुकाराए तो कभी खुद ही रूठ गया। कई बार लिखने पर भी मन सतुष्ट नहीं हुआ और निरंतर कुछ नया लिखने मन बनता रहता है। अजीब सी बेचैनी जो न जाने क्या करवाएगी और कितना कुछ कर गुजर जाने की तमन्ना लिए निकले हैं इन सफरों, जहां उम्मीद और विश्वास दोनों कायम हैं जो अर्जुन के भांति लक्ष्य को भेद देंगे । मुझे अभी अपने जीवन में बहुत कुछ करना है किसी के सपनों को पूरा करना हैं । अब तो बस मेरा एक ही लक्ष्य हैं कि मैं बस उसके सपने पूरें करू।

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