जिंदल यूनिवर्सिटी बनी विजय ज्योति का पहला पड़ाव

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भारतीय सेना की विजय ज्योति (विक्ट्री फ्लेम) की रिले का सोमवार को पहला पड़ाव ओ.पी.जिंदल ग्लोबल यूनिवर्सिटी (जेजीयू) रही। यह ज्योति कारगिल विजय दिवस के 20वीं वर्षगांठ को चिन्हित करने के लिए नई दिल्ली में प्रज्वलित की गई।

यह मशाल रिले राष्ट्रीय युद्ध स्मारक से रविवार को शुरू हुई और यात्रा के दौरान जम्मू एवं कश्मीर के द्रास पहुंचेगी, जहां इसका कारगिल युद्ध स्मारक में अनंत ज्योति में विलय किया जाएगा।

यह ज्योति द्रास पहुंचने से पहले 11 कस्बों व शहरों से गुजरेगी। द्रास में भारतीय सेना के कर्मी व शहीदों के परिवार श्रद्धांजलि अर्पित करेंगे।

ज्योति को ग्रहण करते हुए जेजीयू के रजिस्ट्रार प्रोफेसर वाई.एस.आर.मूर्ति ने कहा, “गौरव, सम्मान व प्रेरणा तीन स्तंभ हैं, जिसकी वजह से एक राष्ट्र के रूप में हम आज सालगिरह मना रहे हैं। जेजीयू की शैक्षणिक बिरादरी विजय ज्योति का गर्मजोशी से स्वागत करती है।”

जिंदल इंस्टीट्यूट ऑफ लीडरशिप व एग्जिक्यूटिव एजुकेशन (जेआईएलडीईई) के वरिष्ठ निदेशक (सेवानिवृत्त) लेफ्टिनेंट जनरल राजेश कोचर ने कहा, “हम जेजीयू में ‘ऑपरेशन विजय’ की 20वीं वर्षगांठ पर सफलतापूर्वक कार्यक्रम की मेजबानी करते हुए गर्व महसूस कर रहे हैं।”

भारतीय सेना ने मई 1999 में पाकिस्तानी सेना को खदेड़ने के लिए ऑपरेशन विजय शुरू किया था। पाकिस्तानी सेना ने नियंत्रण रेखा के पार भारत के कारगिल सेक्टर में घुसपैठ की थी।

यह लड़ाई 26 जुलाई 1999 को खत्म हुई। तब से यह दिवस हर साल ‘कारगिल विजय दिवस’ के तौर पर मनाया जाता है।

न्यूज स्त्रोत आईएएनएस


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बहुत ही मुश्किल है अपने बारे में लिखना । इसलिए ज्यादा कुछ नहीं, मैं बहुत ही सरल व्यतित्व का व्यक्ति हूं । खुशमिजाज हूं ए इसलिए चेहरे पर हमेशा खुशी रहती हैए और मुझे अकेला रहना ज्यादा पंसद है। मेरा स्वभाव है कि मेरी बजह से किसी का कोई नुकसान नहीं होना चाहिए और ना ही किसी का दिल दुखना चाहिए। चाहे वो व्यक्ति अच्छा हो या बुरा। मेरे इस स्वभाव के कारण कभी कभी मुझे खामियाजा भी भुगतान पड़ता है। मैं अक्सर उनके बारे में सोचकर भुला देता हूं क्योंकि खुश रहने का हुनर सिर्फ मेरे पास है। मेरी अपनी विचारए विचारधारा है जिसे में अभिव्यक्त करता रहता हूं । जिन लोगों के विचारों से कभी प्रभावित भी होता हूं तो उन्हें फोलो कर लेता हूं । अभी सफर की शुरुआत है मैने कंप्यूटर ऑफ माटर्स की डिग्री हासिल की है और इस मीडीया क्षेत्र में अभी नया हूं। मगर मुझे अब इस क्षेत्र में काम करना अच्छा लग रहा है। और फिर इसी में काम करने का मन बना लेना दूसरों के लिये अश्चर्य पूर्ण होगा। लेकिन इससे पहले और आज भी ब्लागर ने एक मंच दिया चिठ्ठा के रुप में, जहां बिना रोक टोक के आसानी से सबकुछ लिखा या बताया जा सका। कभी कभी मन में उठ रही बातों या भावों को शब्दों में पिरोयाए उनमें खुद की और दूसरों की कहानी कही। कभी उनके द्वारा किसी को पुकाराए तो कभी खुद ही रूठ गया। कई बार लिखने पर भी मन सतुष्ट नहीं हुआ और निरंतर कुछ नया लिखने मन बनता रहता है। अजीब सी बेचैनी जो न जाने क्या करवाएगी और कितना कुछ कर गुजर जाने की तमन्ना लिए निकले हैं इन सफरों, जहां उम्मीद और विश्वास दोनों कायम हैं जो अर्जुन के भांति लक्ष्य को भेद देंगे । मुझे अभी अपने जीवन में बहुत कुछ करना है किसी के सपनों को पूरा करना हैं । अब तो बस मेरा एक ही लक्ष्य हैं कि मैं बस उसके सपने पूरें करू।

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