झारखंड : भारत बंद का मिला-जुला असर

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तेल की बढ़ी कीमतों को लेकर कांग्रेस द्वारा आहूत और कई पार्टियों द्वारा समर्थित ‘भारत बंद’ का सोमवार को झारखंड में मिला-जुला असर देखने को मिला। कांग्रेस द्वारा आह्वान किए गए बंद का झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो), झारखंड विकास मोर्चा-प्रजातंत्रिक और वामपंथी दलों ने समर्थन किया है।

रांची में स्कूल और कुछ दुकानें बंद हैं। लंबे मार्ग वाली बसें नहीं चल रही हैं और जिला प्रशासन ने निषेधाज्ञा लागू कर दी है।

गिरिडीह जिले में वामपंथी दलों के बंद समर्थकों ने सिमरदीह में जीटी रोड जाम कर दिया। दो घंटों के बाद पुलिस ने जाम हटाया।

हजारीबाग और जमशेदपुर जिलों में भी बंद का प्रभाव दिखाई दे रहा है।

राज्य में बड़ी संख्या में सुरक्षाबलों को तैनात किया गया है क्योंकि कांग्रेस, झामुमो और अन्य विपक्षी दलों के समर्थक सड़कों पर उतरे हुए हैं।

आम जनता पेट्रोल और डीजल की बढ़ती कीमतों के खिलाफ हैं लेकिन बंद के खिलाफ भी है।

रांची के निवासी संतोष कुमार ने कहा, “पेट्रोल और डीजल की बढ़ती कीमतों के चलते घरेलू बजट में हमें परेशानी का समना करना पड़ रहा है लेकिन बंद इसका रास्ता नहीं है।”

न्यूज स्त्रोत आईएएनएस


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बहुत ही मुश्किल है अपने बारे में लिखना । इसलिए ज्यादा कुछ नहीं, मैं बहुत ही सरल व्यतित्व का व्यक्ति हूं । खुशमिजाज हूं ए इसलिए चेहरे पर हमेशा खुशी रहती हैए और मुझे अकेला रहना ज्यादा पंसद है। मेरा स्वभाव है कि मेरी बजह से किसी का कोई नुकसान नहीं होना चाहिए और ना ही किसी का दिल दुखना चाहिए। चाहे वो व्यक्ति अच्छा हो या बुरा। मेरे इस स्वभाव के कारण कभी कभी मुझे खामियाजा भी भुगतान पड़ता है। मैं अक्सर उनके बारे में सोचकर भुला देता हूं क्योंकि खुश रहने का हुनर सिर्फ मेरे पास है। मेरी अपनी विचारए विचारधारा है जिसे में अभिव्यक्त करता रहता हूं । जिन लोगों के विचारों से कभी प्रभावित भी होता हूं तो उन्हें फोलो कर लेता हूं । अभी सफर की शुरुआत है मैने कंप्यूटर ऑफ माटर्स की डिग्री हासिल की है और इस मीडीया क्षेत्र में अभी नया हूं। मगर मुझे अब इस क्षेत्र में काम करना अच्छा लग रहा है। और फिर इसी में काम करने का मन बना लेना दूसरों के लिये अश्चर्य पूर्ण होगा। लेकिन इससे पहले और आज भी ब्लागर ने एक मंच दिया चिठ्ठा के रुप में, जहां बिना रोक टोक के आसानी से सबकुछ लिखा या बताया जा सका। कभी कभी मन में उठ रही बातों या भावों को शब्दों में पिरोयाए उनमें खुद की और दूसरों की कहानी कही। कभी उनके द्वारा किसी को पुकाराए तो कभी खुद ही रूठ गया। कई बार लिखने पर भी मन सतुष्ट नहीं हुआ और निरंतर कुछ नया लिखने मन बनता रहता है। अजीब सी बेचैनी जो न जाने क्या करवाएगी और कितना कुछ कर गुजर जाने की तमन्ना लिए निकले हैं इन सफरों, जहां उम्मीद और विश्वास दोनों कायम हैं जो अर्जुन के भांति लक्ष्य को भेद देंगे । मुझे अभी अपने जीवन में बहुत कुछ करना है किसी के सपनों को पूरा करना हैं । अब तो बस मेरा एक ही लक्ष्य हैं कि मैं बस उसके सपने पूरें करू।

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