झारखंड चुनाव : मुख्यमंत्री रघुवर 5800 वोटों से पीछे, सरयू को निर्णायक बढ़त

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झारखंड विधानसभा चुनाव की सबसे चर्चित सीट जमशेदपुर पूर्वी पर मुख्यमंत्री रघुवर दास 5800 से अधिक वोटों से पीछे चल रहे हैं। इस सीट से निर्दलीय उम्मीदवार भाजपा के बागी सरयू राय के जीत की संभावना लगभग साफ होती दिख रही है। निर्वाचन आयोग की ओर से जारी अपराह्न् तीन बजे तक के आंकड़ों के मुताबिक, सरयू राय को जहां 27,790 वोट मिले हैं, वहीं रघुवर दास के हिस्से 21,896 आए हैं। इस प्रकार सरयू राय मुख्यमंत्री रघुवर दास से 5894 वोटों से आगे चल रहे हैं। माना जा रहा है कि सरयू राय की यह निर्णायक बढ़त हो चुकी है।

बता दें कि भाजपा से इस बार विधानसभा चुनाव का टिकट न मिलने के बाद वरिष्ठ नेता सरयू राय ने बगावत कर मुख्यमंत्री रघुवर दास की सीट से ही ताल ठोक दिया था। जबकि सरयू राय भाजपा के बेहद कद्दावर नेता माने जाते रहे हैं। जब उनका टिकट कटा था तो पार्टी के कई नेता भी चौंक गए थे। सरयू राय ने एक बयान में कहा था कि कभी उनके कहने पर पार्टी दूसरों को टिकट दिया करती थी, आज पार्टी ने उन्हीं का टिकट का दिया।

न्यूज स्त्रेात आईएएनएस

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बहुत ही मुश्किल है अपने बारे में लिखना । इसलिए ज्यादा कुछ नहीं, मैं बहुत ही सरल व्यतित्व का व्यक्ति हूं । खुशमिजाज हूं ए इसलिए चेहरे पर हमेशा खुशी रहती हैए और मुझे अकेला रहना ज्यादा पंसद है। मेरा स्वभाव है कि मेरी बजह से किसी का कोई नुकसान नहीं होना चाहिए और ना ही किसी का दिल दुखना चाहिए। चाहे वो व्यक्ति अच्छा हो या बुरा। मेरे इस स्वभाव के कारण कभी कभी मुझे खामियाजा भी भुगतान पड़ता है। मैं अक्सर उनके बारे में सोचकर भुला देता हूं क्योंकि खुश रहने का हुनर सिर्फ मेरे पास है। मेरी अपनी विचारए विचारधारा है जिसे में अभिव्यक्त करता रहता हूं । जिन लोगों के विचारों से कभी प्रभावित भी होता हूं तो उन्हें फोलो कर लेता हूं । अभी सफर की शुरुआत है मैने कंप्यूटर ऑफ माटर्स की डिग्री हासिल की है और इस मीडीया क्षेत्र में अभी नया हूं। मगर मुझे अब इस क्षेत्र में काम करना अच्छा लग रहा है। और फिर इसी में काम करने का मन बना लेना दूसरों के लिये अश्चर्य पूर्ण होगा। लेकिन इससे पहले और आज भी ब्लागर ने एक मंच दिया चिठ्ठा के रुप में, जहां बिना रोक टोक के आसानी से सबकुछ लिखा या बताया जा सका। कभी कभी मन में उठ रही बातों या भावों को शब्दों में पिरोयाए उनमें खुद की और दूसरों की कहानी कही। कभी उनके द्वारा किसी को पुकाराए तो कभी खुद ही रूठ गया। कई बार लिखने पर भी मन सतुष्ट नहीं हुआ और निरंतर कुछ नया लिखने मन बनता रहता है। अजीब सी बेचैनी जो न जाने क्या करवाएगी और कितना कुछ कर गुजर जाने की तमन्ना लिए निकले हैं इन सफरों, जहां उम्मीद और विश्वास दोनों कायम हैं जो अर्जुन के भांति लक्ष्य को भेद देंगे । मुझे अभी अपने जीवन में बहुत कुछ करना है किसी के सपनों को पूरा करना हैं । अब तो बस मेरा एक ही लक्ष्य हैं कि मैं बस उसके सपने पूरें करू।

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