जेट दिवालिया मामला : आरपी, डच प्रशासक सहयोग को राजी

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जेट एयरवेज के दिवालिया मामले में एक बड़े घटनाक्रम में जेट एयरवेज के रिजॉल्यूशन प्रोफेशनल (आरपी) और डच कोर्ट के प्रशासक ने एयरलाइन की दिवाला कार्यवाही में सहयोग करने पर सहमति जताई है।

दोनों पक्षों की तरफ से पेश अधिवक्ताओं ने नेशनल कंपनी लॉ अपीलेट ट्रिब्यूनल (एनसीएलएटी) को सूचित किया कि आरपी और डच प्रशासक ने चल रही प्रक्रिया में सहयोग के नियम और शर्तो पर सहमति जताई है।

अधिवक्ता ने कहा कि कर्जदाताओं की समिति (सीओसी) ने एक को छोड़कर सभी शर्तो पर सहमति जताई है, जिसमें डच प्रशासकों के सभी बैठकों में मौजूद होने की बात थी।

एनसीएलएटी के चेयरमैन एस. जे. मुखोपाध्याय ने हालांकि पाया कि डच प्रशासकों का यह अधिकार है कि वह सीओसी की बैठकों में मौजूद रहे और दोनों पक्षों को साथ मिलकर आगे बढ़ना चाहिए।

अपीलेट ट्रिब्यूनल ने यह भी कहा कि दिवालिया समाधान प्रक्रिया में पारदर्शिता होनी चाहिए।

कर्ज से लदी जेट एयरवेज को नीदरलैंड्स में भी दिवालिया कार्रवाई का सामना करना पड़ रहा है। दो यूरोपीयन कर्जदाताओं को भुगतान करने में विफल रहने के बाद कंपनी को दिवालिया घोषित कर दिया गया। डच अदालत ने इसके बाद दिवालिया प्रशासक की नियुक्ति की।

चेयरमैन मुखोपाध्याय की अगुवाई वाली तीन सदस्यीय एनसीएलएटी बेंच ने दोनों पक्षों से सोमवार तक नियम और शर्तो को जमा कराने को कहा है और मामले की अगली सुनवाई 24 सितम्बर को की जाएगी।

अपनी पिछली सुनवाई में एनसीएएलटी ने जेट एयरवेज के सीओसी को एक हलफनामा दाखिल करने को कहा था कि क्या वह डच प्रशासकों के साथ सहयोग के लिए तैयार हैं।

नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल की मुंबई बेंच ने डच प्रशासकों के उस आवेदन को खारिज कर दिया था, जिसमें उनकी कार्रवाई को मान्यता देने को कहा गया था। इसके बाद प्रशासक ने एनसीएलएटी का रुख किया।

अब बंद हो चुकी एयरलाइन पर कर्जदाताओं का 8,000 करोड़ रुपये से अधिक बकाया है। इसके अलावा एयरलाइन का कुल दायित्व करीब 25,000 करोड़ रुपये का है, जिसमें परिचालन के लिए लिए गए कर्ज का बकाया भी शामिल है।

न्यूज स्त्रोत आईएएनएस


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