जेपी हॉस्पिटल ने 92 साल की इराकी महिला को दी नई जिंदगी

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नोएडा के जेपी हॉस्पिटल ने कहा है कि हृदय की गंभीर बीमारी से पीड़ित 92 साल की एक इराकी महिला महरोब सादून अब्बास को उसके डॉक्टरों ने नया जीवन दिया है। एक बयान में कहा गया है कि बीमारी की वजह से महिला के दिल की बाईं धमनी ने 90 प्रतिशत तक काम करना बंद कर दिया था, जिससे उनके बचने की संभावना काफी कम थी। कार्डियक सर्जरी के निदेशक डॉ. मनोज लूथरा ने अपनी टीम के साथ कोरोनरी आर्टरी बाइपास सर्जरी (सीएबीजी) को सफलतापूर्वक पूरा कर महिला को नया जीवन दिया।

बयान के मुताबिक, इराक की रहने वाली महरोब सादून अब्बास पिछले 10 साल से दिल की बीमारी से जूझ रही थीं और ब्लॉकेज दूर करने के लिए उन्हें दो बार स्टेंट लगाए गए थे। स्टेंट की वजह से उन्हें छाती में हमेशा दर्द रहता था, कमजोरी रहती और कुछ भी करने या अक्सर आराम से रहने पर भी सांस फूलने लगती थी। इन बीमारियों और बढ़ती उम्र से उनकी हालत बिगड़ने लगी, उनका चलना मुश्किल हो गया। इसके अलावा डायबीटीज, हाई ब्लड प्रेशर और किडनी की अंतिम स्टेज की बीमारी उनके लिए घातक सिद्ध हो रही थी।

जेपी हॉस्पिटल के कार्डियक सर्जरी के निदेशक डॉ. मनोज लूथरा ने बताया, “महरोब सादून अब्बास दिल-धमनी की बीमारी की मरीज थीं। इसमें एक या अधिक धमनियां ब्लॉक हो जाती हैं और दिल को खून नहीं पहुंचता है। मरीज की पहले भी दो बार बड़ी हार्ट सर्जरी हो चुकी है और ब्लॉकेज दूर करने के लिए स्टेंट भी लगाए गए थे। ब्लॉकेज की समस्या फिर भी हो गई। उनकी उम्र और अन्य बीमारियों को देखते हुए ईरान और तुर्की के प्रमुख हॉस्पिटलों ने उनकी सर्जरी करने से मना कर दिया क्योंकि इसमें बड़ा जोखिम था।”

उन्होंने कहा, “महिला की हालत देखते हुए उनका परिवार यहां पहुंचा। गहन जांच से यह पता चला कि मरीज को दिल के बाएं भाग (बाएं मुख्य दिल-धमनी में ब्लॉकेज की गंभीर समस्या) की गंभीर बीमारी है। इससे उनके बीमार रहने और जान जाने का भी खतरा था। इतना ही नहीं, इससे पहले लगे स्टेंट भी आंशिक रूप से ब्लॉक हो गए थे जिससे मरीज की हालत और खराब हो गई थी। इसके बाद डाक्टरों ने मरीज को कोरोनरी बाइपास ग्राफ्टिंग सर्जरी की सलाह दी।”

डॉ. लूथरा ने कहा, “हमने पूरी बारीकी से ऑपरेशन शुरू किया। सर्जरी में न्यूनतम चीरा लगाने की प्रक्रिया अपनाई गई ताकि सर्जरी के दौरान जोखिम और संबंधित समस्याओं का खतरा भी न्यूनतम हो। हमने अपने कौशल का पूरा लाभ लेते हुए निर्धारित समय के अंदर सर्जरी पूरी कर ली और सफल रहे। सर्जरी के बाद मरीज की उचित देखभाल की गई और मरीज के सभी ‘वाइटल्स’ स्थिर देखते हुए 26 अगस्त 2018 को उन्हें अस्पताल से छुट्टी दे दी गई।”

ऑपरेशन के बाद महरोब सादून अब्बास ने कहा, “जेपी हॉस्पिटल ने मुझे नई जिन्दगी दी है। मैं तो उम्मीद हार गई थी पर मेरे परिवार के लोगों की जिद पर इलाज के लिए भारत आई। जेपी हॉस्पिटल की देखभाल से न केवल मेरा शरीर स्वस्थ हुआ बल्कि मुझे जीने का नया उत्साह मिल गया। अब मुझे नए सिरे से जिन्दगी जीनी है।”

न्यूज स्त्रोत आईएएनएस


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बहुत ही मुश्किल है अपने बारे में लिखना । इसलिए ज्यादा कुछ नहीं, मैं बहुत ही सरल व्यतित्व का व्यक्ति हूं । खुशमिजाज हूं ए इसलिए चेहरे पर हमेशा खुशी रहती हैए और मुझे अकेला रहना ज्यादा पंसद है। मेरा स्वभाव है कि मेरी बजह से किसी का कोई नुकसान नहीं होना चाहिए और ना ही किसी का दिल दुखना चाहिए। चाहे वो व्यक्ति अच्छा हो या बुरा। मेरे इस स्वभाव के कारण कभी कभी मुझे खामियाजा भी भुगतान पड़ता है। मैं अक्सर उनके बारे में सोचकर भुला देता हूं क्योंकि खुश रहने का हुनर सिर्फ मेरे पास है। मेरी अपनी विचारए विचारधारा है जिसे में अभिव्यक्त करता रहता हूं । जिन लोगों के विचारों से कभी प्रभावित भी होता हूं तो उन्हें फोलो कर लेता हूं । अभी सफर की शुरुआत है मैने कंप्यूटर ऑफ माटर्स की डिग्री हासिल की है और इस मीडीया क्षेत्र में अभी नया हूं। मगर मुझे अब इस क्षेत्र में काम करना अच्छा लग रहा है। और फिर इसी में काम करने का मन बना लेना दूसरों के लिये अश्चर्य पूर्ण होगा। लेकिन इससे पहले और आज भी ब्लागर ने एक मंच दिया चिठ्ठा के रुप में, जहां बिना रोक टोक के आसानी से सबकुछ लिखा या बताया जा सका। कभी कभी मन में उठ रही बातों या भावों को शब्दों में पिरोयाए उनमें खुद की और दूसरों की कहानी कही। कभी उनके द्वारा किसी को पुकाराए तो कभी खुद ही रूठ गया। कई बार लिखने पर भी मन सतुष्ट नहीं हुआ और निरंतर कुछ नया लिखने मन बनता रहता है। अजीब सी बेचैनी जो न जाने क्या करवाएगी और कितना कुछ कर गुजर जाने की तमन्ना लिए निकले हैं इन सफरों, जहां उम्मीद और विश्वास दोनों कायम हैं जो अर्जुन के भांति लक्ष्य को भेद देंगे । मुझे अभी अपने जीवन में बहुत कुछ करना है किसी के सपनों को पूरा करना हैं । अब तो बस मेरा एक ही लक्ष्य हैं कि मैं बस उसके सपने पूरें करू।

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