मुसीबत में जनता को छोड़कर ‘गुमशुदा’ हो जाती है नीतीश सरकार : जविपा

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जनतांत्रिक विकास पार्टी (जविपा) के प्रमुख अनिल कुमार ने सोमवार को आरोप लगाया कि जब भी बिहार की जनता मुसीबत में आई, तब नीतीष सरकार ‘गुमशुदा’ हो जाती है। कोरोना संकट ताजा उदाहरण है जब खुद नीतीश कुमार भी गुमशुदा नजर आए। जविपा के अध्यक्ष अनिल कुमार ने पार्टी कार्यालय में आयोजित प्रेस कांफ्रेंस में घोषणा करते हुए कहा कि गुमशुदा मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के 15 साल के कार्यकलापों का पोल खोलने के लिए 16 अगस्त को ‘बिहार नवनिर्माण रैली’ के नाम से डिजिटल रैली की जाएगी।

उन्होंने कहा कि कोरोना में देश में अचानक लॉकडाउन के दौरान अपने ही राज्य के लोगों को लाने के लिए तैयार नहीं थे और जब हम लोगों ने सरकार पर दवाब बनाया, तो उनकी वापसी हुई। कुमार ने बिहार की स्वास्थ्य व्यवस्था और सरकार की भूमिका पर भी सवाल खड़े किए।

उन्?होंने कहा, “हमने पहले से ही सरकार को प्रदेश की स्वास्थ्य व्यवस्था को लेकर आगाह किया था, लेकिन प्रदेश की गुमशुदा नीतीश सरकार सुनने को तैयार नहीं थी। नतीजा आज बिहार में कोरोना संक्रमण के केस 80 हजार को पार करने वाले हैं। बिहार ऐसा पहला प्रदेश बन गया, जहां कोरोना काल में तीन-तीन स्वास्थ्य सचिव बदल दिये गए।”

उन्होंने दावा करते हुए कहा कि कोरोना वायरस के कारण भारत में होने वाली डॉक्टर की कुल मौतों का 0.5 प्रतिशत है जबकि बिहार में, डॉक्टरों की मृत्यु का प्रतिशत 4.75 प्रतिशत है, जो राष्ट्रीय औसत से नौ गुना अधिक है। ऐसे में थाली, ताली, दीया और फूल की वर्षा तो खूब हुई, मगर उनके जान की हिफाजत के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया।

उन्होंने मौत के षिकार हुए सभी कोरोना वॉरियर्स के के परिजनों को एक करोड़ का अनुदान राशि देने तथा उन्हें सभी को शहीद का दर्जा देने की मांग की।

कुमार ने कहा कि पटना में एनएमसीएच 700 बेड का अस्पताल है, लेकिन कोरोना काल में 100 बेड भी तैयार नहीं थी। जब इसकी शिकायत एनएमसीएच अधीक्षक ने की तो उन्हें ही निलंबित कर दिया गया। पटना एम्स को भी केवल वीवीआई का इलाज के लिए बना दिया गया।

न्यूज स्त्रोत आईएएनएस

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बहुत ही मुश्किल है अपने बारे में लिखना । इसलिए ज्यादा कुछ नहीं, मैं बहुत ही सरल व्यतित्व का व्यक्ति हूं । खुशमिजाज हूं ए इसलिए चेहरे पर हमेशा खुशी रहती हैए और मुझे अकेला रहना ज्यादा पंसद है। मेरा स्वभाव है कि मेरी बजह से किसी का कोई नुकसान नहीं होना चाहिए और ना ही किसी का दिल दुखना चाहिए। चाहे वो व्यक्ति अच्छा हो या बुरा। मेरे इस स्वभाव के कारण कभी कभी मुझे खामियाजा भी भुगतान पड़ता है। मैं अक्सर उनके बारे में सोचकर भुला देता हूं क्योंकि खुश रहने का हुनर सिर्फ मेरे पास है। मेरी अपनी विचारए विचारधारा है जिसे में अभिव्यक्त करता रहता हूं । जिन लोगों के विचारों से कभी प्रभावित भी होता हूं तो उन्हें फोलो कर लेता हूं । अभी सफर की शुरुआत है मैने कंप्यूटर ऑफ माटर्स की डिग्री हासिल की है और इस मीडीया क्षेत्र में अभी नया हूं। मगर मुझे अब इस क्षेत्र में काम करना अच्छा लग रहा है। और फिर इसी में काम करने का मन बना लेना दूसरों के लिये अश्चर्य पूर्ण होगा। लेकिन इससे पहले और आज भी ब्लागर ने एक मंच दिया चिठ्ठा के रुप में, जहां बिना रोक टोक के आसानी से सबकुछ लिखा या बताया जा सका। कभी कभी मन में उठ रही बातों या भावों को शब्दों में पिरोयाए उनमें खुद की और दूसरों की कहानी कही। कभी उनके द्वारा किसी को पुकाराए तो कभी खुद ही रूठ गया। कई बार लिखने पर भी मन सतुष्ट नहीं हुआ और निरंतर कुछ नया लिखने मन बनता रहता है। अजीब सी बेचैनी जो न जाने क्या करवाएगी और कितना कुछ कर गुजर जाने की तमन्ना लिए निकले हैं इन सफरों, जहां उम्मीद और विश्वास दोनों कायम हैं जो अर्जुन के भांति लक्ष्य को भेद देंगे । मुझे अभी अपने जीवन में बहुत कुछ करना है किसी के सपनों को पूरा करना हैं । अब तो बस मेरा एक ही लक्ष्य हैं कि मैं बस उसके सपने पूरें करू।

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