आर्मी बैंड और मशाल की रोशनी के बीच हुआ ‘जश्न-ए-हिंद’

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दिल्ली के इंदिरा गांधी नेशनल सेंटर फॉर द आर्ट्स में कला महोत्सव जश्न-ए-हिंद -भारतीय लोकाचार का कला उत्सव आगाज हुआ है। कला का यह रंगारंग कार्यक्रम दिल्ली के इंदिरा गांधी नेशनल सेंटर फॉर द आर्ट्स के साथ मिलकर भारत की सांस्कृतिक विरासत एवं कला के लिए समर्पित स्वयंसेवी संस्था साक्षी द्वारा आयोजित किया गया। ‘जश्न-ए-हिंद’ कार्यक्रम के उद्घाटन के बाद सैनिकों को सलामी ,आर्मी बैंड एवं मशाल की रोशनी के अदभुत संगम वाली देश प्रेम के रंग में रंग में डूबी प्रस्तुति दी गई। इसके बाद जाने माने गायक निजामी द्वारा प्रस्तुत साईं भजन ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध किया। साथ ही फरीद हसन खान द्वारा ठुमरी ख्याल गायकी का कार्यक्रम हुआ।

फिर शुरू हुई ‘बात शायरी की’ कार्यक्रम जिसमें अशोक चक्रधर और कुंवर रणजीत चैहान के साथ पीयूष मिश्रा का संवाद काफी प्रभावी रहा। पहले दिन की कार्यक्रम का समापन पदमश्री सोभना नारायण द्वारा प्रस्तुत शास्त्रीय नृत्य से हुआ। सोभना नारायण ने अपनी नृत्य से लोगों को प्रभावित किया।

तीन दिवसीय मेगा महोत्सव जश्न- ई-हिंद -भारतीय लोकाचार का कला उत्सव में पैनल डिस्कशन, गजल गायन, गुरबानी, सूफी संगीत, मुशायरा, शास्त्रीय नृत्य और संगीत, नाटक में यूथ सहित विभिन्न साहित्यिक और कला पृष्ठभूमि के प्रतिष्ठित विद्वानों और विश्व-प्रसिद्ध गणमान्य लोगों द्वारा बहु-केंद्रित सत्र और कला प्रदर्शन होंगे।

न्यूज स्त्रोत आईएएनएस

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बहुत ही मुश्किल है अपने बारे में लिखना । इसलिए ज्यादा कुछ नहीं, मैं बहुत ही सरल व्यतित्व का व्यक्ति हूं । खुशमिजाज हूं ए इसलिए चेहरे पर हमेशा खुशी रहती हैए और मुझे अकेला रहना ज्यादा पंसद है। मेरा स्वभाव है कि मेरी बजह से किसी का कोई नुकसान नहीं होना चाहिए और ना ही किसी का दिल दुखना चाहिए। चाहे वो व्यक्ति अच्छा हो या बुरा। मेरे इस स्वभाव के कारण कभी कभी मुझे खामियाजा भी भुगतान पड़ता है। मैं अक्सर उनके बारे में सोचकर भुला देता हूं क्योंकि खुश रहने का हुनर सिर्फ मेरे पास है। मेरी अपनी विचारए विचारधारा है जिसे में अभिव्यक्त करता रहता हूं । जिन लोगों के विचारों से कभी प्रभावित भी होता हूं तो उन्हें फोलो कर लेता हूं । अभी सफर की शुरुआत है मैने कंप्यूटर ऑफ माटर्स की डिग्री हासिल की है और इस मीडीया क्षेत्र में अभी नया हूं। मगर मुझे अब इस क्षेत्र में काम करना अच्छा लग रहा है। और फिर इसी में काम करने का मन बना लेना दूसरों के लिये अश्चर्य पूर्ण होगा। लेकिन इससे पहले और आज भी ब्लागर ने एक मंच दिया चिठ्ठा के रुप में, जहां बिना रोक टोक के आसानी से सबकुछ लिखा या बताया जा सका। कभी कभी मन में उठ रही बातों या भावों को शब्दों में पिरोयाए उनमें खुद की और दूसरों की कहानी कही। कभी उनके द्वारा किसी को पुकाराए तो कभी खुद ही रूठ गया। कई बार लिखने पर भी मन सतुष्ट नहीं हुआ और निरंतर कुछ नया लिखने मन बनता रहता है। अजीब सी बेचैनी जो न जाने क्या करवाएगी और कितना कुछ कर गुजर जाने की तमन्ना लिए निकले हैं इन सफरों, जहां उम्मीद और विश्वास दोनों कायम हैं जो अर्जुन के भांति लक्ष्य को भेद देंगे । मुझे अभी अपने जीवन में बहुत कुछ करना है किसी के सपनों को पूरा करना हैं । अब तो बस मेरा एक ही लक्ष्य हैं कि मैं बस उसके सपने पूरें करू।

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