जापान भूकंप : मृतकों की संख्या बढ़कर 18 हुई

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जापान के प्रधानमंत्री शिंजो आबे ने शुक्रवार को ऐलान किया कि होक्काइदो में आए भूकंप से हुए विभिन्न हादसों में मृतकों की संख्या बढ़कर 16 हो गई है, जबकि 26 अन्य अभी भी लापता हैं। रिक्टर पैमाने पर इस भूकंप की तीव्रता 6.7 थी। कैबिनेट की आपात बैठक के बाद आबे ने कहा, “अभी तक 16 (मृत) लोग हैं और कई अन्य घायल हैं, 26 अभी भी लापता हैं।”

समाचार एजेंसी एफे के मुताबिक, आबे ने कहा कि प्रभावित क्षेत्रों में बचाव कार्य चल रहा है और लोगों से अगले कुछ घंटों तक अत्यधिक सावधानी बरतने का आग्रह किया गया है, क्योंकि बारिश से और अधिक भूस्खलन होने की आशंका है।

अर्थव्यवस्था, व्यापार एवं उद्योग मंत्री हिरोशिगे सेको ने कहा कि शुक्रवार सुबह तक होक्काइदो की 47 प्रतिशत बिजली आपूर्ति बहाल हो गई है।

सेको के अनुसार, सुबह छह बजे तक 14 लाख घरों व प्रतिष्ठानों की बिजली आपूर्ति बहाल कर दी गई।

हाई स्पीड रेलवे ऑपरेटर जेआर होक्काइदो ने कहा कि दोपहर के आसपास परिचालन शुरू हो जाएगा। मुख्य हवाईअड्डे पर शुक्रवार से परिचालन शुरू हो जाएगा और ट्रेन सेवाएं भी सप्ताहांत से शुरू कर दी जाएगी।

न्यूज स्त्रोत आईएएनएस


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बहुत ही मुश्किल है अपने बारे में लिखना । इसलिए ज्यादा कुछ नहीं, मैं बहुत ही सरल व्यतित्व का व्यक्ति हूं । खुशमिजाज हूं ए इसलिए चेहरे पर हमेशा खुशी रहती हैए और मुझे अकेला रहना ज्यादा पंसद है। मेरा स्वभाव है कि मेरी बजह से किसी का कोई नुकसान नहीं होना चाहिए और ना ही किसी का दिल दुखना चाहिए। चाहे वो व्यक्ति अच्छा हो या बुरा। मेरे इस स्वभाव के कारण कभी कभी मुझे खामियाजा भी भुगतान पड़ता है। मैं अक्सर उनके बारे में सोचकर भुला देता हूं क्योंकि खुश रहने का हुनर सिर्फ मेरे पास है। मेरी अपनी विचारए विचारधारा है जिसे में अभिव्यक्त करता रहता हूं । जिन लोगों के विचारों से कभी प्रभावित भी होता हूं तो उन्हें फोलो कर लेता हूं । अभी सफर की शुरुआत है मैने कंप्यूटर ऑफ माटर्स की डिग्री हासिल की है और इस मीडीया क्षेत्र में अभी नया हूं। मगर मुझे अब इस क्षेत्र में काम करना अच्छा लग रहा है। और फिर इसी में काम करने का मन बना लेना दूसरों के लिये अश्चर्य पूर्ण होगा। लेकिन इससे पहले और आज भी ब्लागर ने एक मंच दिया चिठ्ठा के रुप में, जहां बिना रोक टोक के आसानी से सबकुछ लिखा या बताया जा सका। कभी कभी मन में उठ रही बातों या भावों को शब्दों में पिरोयाए उनमें खुद की और दूसरों की कहानी कही। कभी उनके द्वारा किसी को पुकाराए तो कभी खुद ही रूठ गया। कई बार लिखने पर भी मन सतुष्ट नहीं हुआ और निरंतर कुछ नया लिखने मन बनता रहता है। अजीब सी बेचैनी जो न जाने क्या करवाएगी और कितना कुछ कर गुजर जाने की तमन्ना लिए निकले हैं इन सफरों, जहां उम्मीद और विश्वास दोनों कायम हैं जो अर्जुन के भांति लक्ष्य को भेद देंगे । मुझे अभी अपने जीवन में बहुत कुछ करना है किसी के सपनों को पूरा करना हैं । अब तो बस मेरा एक ही लक्ष्य हैं कि मैं बस उसके सपने पूरें करू।

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