कृष्ण जन्माष्टमी विशेष: ग्रहों की स्थिति आज भी कृष्ण जन्म जैसी, जानिए पूजा का विधान

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इस बार भगवान श्रीकृष्ण की जन्माष्टमी पर वैसी ही ग्रह स्थिति हैं, जैसी भगवान श्री कृष्ण के जन्म के वक्त बनी थी। वही ज्योतिष के मुताबिक बताया कि भविष्य पुराण अनुसार द्वापर युग में जब भगवान श्री कृष्ण का मथुरा में कंस के कारागार में अवतार हुआ उस समय रोहिणी नाम का नक्षत्र था। वृष राशि के उच्च राशि में चंद्रमा सिंह राशि में सूर्यदेव विचरण कर रहे थे। भाद्रपद मास कृष्ण पक्ष, अष्टमी तिथि को निशीथ बेला में मध्य रात्रि में भगवान का जन्म हुआ था। आज वही रोहिणी नक्षत्र पुन जन्म के समय आ गया हैं वही ग्रह स्थिति भी उसी प्रकार की आ गई हैं।

वही ज्योतिष का कहना हैं कि चंद्रवंशी भगवान श्रीकृष्ण के जन्म के समय द्वापर में हुई घटना आज भी घटित होती हैं श्रीमद् भागवत दसम् स्कंध में कृष्ण जन्म प्रसंग में उल्लेख मिलता हैं कि जिस वक्त पृथ्वी पर अर्धरात्रि में कृष्ण अवतरित हुए ठीक उसी समय आकाश में कृष्ण के पूर्वज चंद्रदेव प्रकट हुए। नारायण द्वारा अपने कुल में जन्म को लेकर चंद्रमा को उत्सुकता थीं वह अपने वंशज के जन्म का साक्षी बने। वही ब्रज में उस समय घनघोर बादल छाए थे। मगर चंद्रदेव ने दिव्य दृष्टि से अपने वंशज को जन्म लेते दर्शन किए। आज भी कृष्ण जन्म के समय अर्धरात्रि में चंद्रमा उदय होता हैं वही 24 अगस्त को चंद्रोदय रात 12 बजे का पंचांग में दिया हुआ हैं। वही ज्योतिष ने कहा कि चंद्रमा की सबसे प्रिय पत्नी रोहिणी हैं इसीलिए श्रीकृष्ण ने राहिणी नक्षत्र में जन्म लिया।

जानिए पूजा का वि​धान—
कामेश्वर चतुर्वेदी ने बताया कि कृष्ण जन्माष्टमी तिथि को प्रात काल ब्रह्म मुहूर्त में जाग कर स्नान आदि से निवृत्त होकर जन्मोत्सव व्रत करूंगा इस तरह से संकल्प करके पूजन की सभी सामग्री एकत्र करें अपने घर में झांकियां भी बनाएं, रोली चावल, नाना प्रकार के पुष्प, खीरा, पांच प्रकार के फल, केले के पत्ते खिलौने, खरबूजे की मिर्गी और गोला का पाग बनाएं।

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