जन्माष्टमी विशेष: आधुनिक मार्शल आर्ट सबसे पहले श्रीकृष्ण ने किया था… जानें रोचक जानकारी

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जयपुर । हिन्दू धर्म की मान्यताओं के अनुसार भगवान विष्णु के अवतार भगवान श्री कृष्ण 64 कलाओं में निपूर्ण थे। ऐसा माना जाता है कि अब तक भगवान के अन्य अवतार 64 कलाओं में निपूर्ण नहीं हुए हैं। आज भगवान श्री कृष्ण का जन्म दिवस अर्थात जन्माष्टमी का पावन पर्व हैं। तथा देश भर में आज भगवान कृष्ण के इस पवित्र त्योहार को बड़ी ही धूम दाम से मनाया जा रहा हैं। इस लिए आज हम आपके लिए इस आर्टिकल में भगवान श्री कृष्ण से जुड़ी कुछ रोचक बातें लेकर आए हैं।

शास्त्रों के अनुसार भारतीय परंपरा और जनश्रुति अनुसार भगवान श्रीकृष्ण ने ही मार्शल आर्ट का अविष्कार किया था। दरअसल पहले इसे कालारिपयट्टू कहा जाता था। इस विद्या के माध्यम से ही उन्होंने चाणूर और मुष्टिक जैसे मल्लों का वध किया था तब उनकी उम्र 16 वर्ष की थी। कहा जाता है कि श्री कृ।्ण ने मथुरा में दुष्ट रजक के सिर को हथेली के प्रहार से काट दिया था।

शास्त्रों के अनुसार श्रीकृष्ण ने मार्शल आर्ट का विकास ब्रज क्षेत्र के वनों में किया था। डांडिया रास उसी का एक नृत्य रूप है। कालारिपयट्टू विद्या के प्रथम आचार्य श्रीकृष्ण को ही माना जाता है। हालांकि इसके बाद इस विद्या को अगस्त्य मुनि ने प्रचारित किया था। इस विद्या के कारण ही ‘नारायणी सेना’ भारत की सबसे भयंकर प्रहारक सेना बन गई थी।

श्रीकृष्ण ने ही कलारिपट्टू की नींव रखी, जो बाद में बोधिधर्मन से होते हुए आधुनिक मार्शल आर्ट में विकसित हुई। बोधिधर्मन के कारण ही यह विद्या चीन, जापान आदि बौद्ध राष्ट्रों में खूब फली-फूली। आज भी यह विद्या केरल और कर्नाटक में प्रचलित है।

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