जन्माष्टमी 2020: द्वापर युग के सर्वश्रेष्ठ पुरुष हैं भगवान श्रीकृष्ण

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जगत के पालनहार श्रीविष्णु के आठवें अवतार भगवान कृष्ण को माना जाता हैं। द्वापरयुग में उनका जन्म हुआ और उन्हें इस युग के सर्वश्रेष्ठ पुरुष का स्थान प्राप्त हैं श्रीमद्भागवत गीता के लिए भगवान कृष्ण को जगतगुरु का सम्मान दिया जाता हैं तो आज हम आपको अपने इस लेख में भगवान श्रीकृष्ण से जुड़ी कुछ रोचक बातें बताने जा रहे हैं तो आइए जानते हैं।

आपको बता दें कि भगवान कृष्ण ने उज्जैन के संदीपनी आश्रम में कुछ महीने में ही अपनी शिक्षा पूरी कर ली थी। कृष्ण ने डांडिया रास का आरंभ किया था। कलारीपट्टु का प्रथम आचार्य भगवान श्रीकृष्ण को ही माना जाता हैं जो बाद में मार्शल आर्ट के रूप में जाना जाता हैं इसी के कारण भगवान कृष्ण की नारायणी सेना सबसे प्रहारक सेना बन गई। भगवान श्रीकृष्ण के खड्ग का नाम नंदक, गदा का नाम कौमौदकी और शंख का नाम पांचजन्य हैं भगवान कृष्ण के धनुष का नाम शारंग व चक्र का नाम सुदर्शन हैं, पुराणों के मुताबिक भगवान कृष्ण की दूसरी माता का नाम रोहणी था। रोहिणी के पुत्र बलराम हैं जो कि शेषनाग के अवतार माने जाते हैं। भगवान कृष्ण ने विश्व का प्रथम जीवाणु युद्ध किया। श्रीराधा रानी बरसाना की रहने वाली थी और कृष्ण से उम्र में बड़ी भी थी। राधा रानी का वर्णन महाभारत, हरिवंशपुराण , विष्णुपुराण व भागवतपुराण में नहीं हैं उनका उल्लेख ब्रह्मवैवर्त पुराण, गीत गोविंद व जनश्रुतियों में रहा हैं कृष्ण भगवान आखिरी वर्षों को छोड़कर कभी भी द्वारिका में छह महीने से अधिक नहीं रहे। श्रीकृष्ण भगवान ने राधा रानी से प्रेम किया था मगर उनका विवाह रूक्मणी से हुआ।

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