जामिया मामला : सॉलिसिटर जनरल मेहता ने सुनवाई के दौरान गालिब की शायरी सुनाई

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दिल्ली हाईकोर्ट द्वारा जामिया मामले की सुनवाई के दौरान सोमवार को सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता का शायराना अंदाज देखने को मिला और उन्होंने मशहूर उर्दू शायर मिर्जा गालिब की शायरी सुनाई। पिछले साल जामिया मिलिया इस्लामिया में और उसके आसपास हुई हिंसा से संबंधित मामलों की सुनवाई के दौरान मेहता ने शायराना अंदाज में कहा, “कासिद के आते-आते खत एक और लिख रखूं। मैं जानता हूं जो वो लिखेंगे जवाब में।”

मुख्य न्यायाधीश डी.एन. पटेल और न्यायमूर्ति प्रतीक जालान की वाली पीठ वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए मामले की सुनवाई कर रही थी।

याचिकाकर्ता की ओर से पेश वरिष्ठ वकील सलमान खुर्शीद के यह कहने के बाद कि सॉॅलिसिटर जनरल उर्दू शायरी के बड़े शौकीन हैं और उनके पास इसका विशाल संग्रह है, मेहता ने शायरी सुनाई। एक दुर्लभ क्षण था जब खुर्शीद ने इशारा किया और मेहता शायरी सुनाने पर मजबूर हो गए।

सॉलिसिटर जनरल ने यह भी कहा, “गालिब की तरह, मैं इस अदालत के सामने अपने मुद्दों को विचार के लिए संक्षिप्त रूप में रखूंगा।”

सुनवाई के दौरान, मेहता ने याचिकाओं में दिए गए कुछ बयानों पर भी आपत्ति जताई और दिल्ली हाईकोर्ट को बताया कि इस तरह के बयान ‘एक राजनीतिक प्रकृति के अधिक हैं, जो एक विरोध प्रदर्शन स्थल पर दिए जाते हैं’ और अदालत के सामने दलील में नहीं दिए जाते।

एक याचिका में आरोपों पर उन्होंने आपत्ति जताई, जिसमें कहा गया था कि “गृहमंत्री ने निर्देश दिया था कि आप (पुलिस) छात्रों की निर्दयतापूर्वक पिटाई करें और उनकी हड्डियां तोड़ दें।”

तुषार मेहता ने पिछले साल दिसंबर में जामिया में और उसके आस-पास हुई हिंसा से संबंधित याचिका में इस्तेमाल की जा रही कुछ भाषा को हटाने की मांग करते हुए कहा, कि यह एक विरोध प्रदर्शन स्थल पर किया जा रहा एक राजनीतिक बयान जैसा है और एक अदालत के सामने दलील देने की भाषा नहीं है। कोर्ट अब मामले की आगे की सुनवाई 13 जुलाई को करेगी।

न्यूज स्त्रोत आईएएनएस

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