देवी की आरती करें इससे

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जयपुर। हिन्दू धर्म के अनुसार शुक्रवार का दिन देवी के सभी रुपों को समर्पित है। देवी दुर्गा के अलग अलग कई स्वरुपों हैं। इन स्वरुपों की शुक्रवार के दिन पूजा अर्चना की जाती है। देवी की पूजा करने से जीवन में सुख की प्राप्त होने के साथ जीवन से कई कष्ट दूर होता है।

आज देवी की इस आरती को देवी पूजा के बाद करने से भक्तों को परम सुख की प्राप्ति होती है।  देवी अपने भक्तो पर हमेशा कृपा करती है। भक्तो पर अपनी कृपा बनाए रखती है।

जय जय हे जगदम्बे माता,
द्वार तिहारे जो भी आता,
बिन माँगे सबकुछ पा जाता,
जय जय हें जगदम्बे माता,
जय जय हे जगदम्बे माता।।

तू चाहे तो जीवन दे दे,
चाहे पल में जीवन ले ले,
तू चाहे तो जीवन दे दे,
चाहे तो पल में जीवन ले ले,
जन्म मरण सब हाथ में तेरे,
हे शक्ति हे माता,
जय जय हें जगदम्बे माता,
जय जय हे जगदम्बे माता।।

 

पापी हो या कोई पुजारी,
राजा हो या कोई भिखारी,
पापी हो या कोई पुजारी,
राजा हो या कोई भिखारी,
फिर भी तूने जोड़ा सबसे,
माँ बेटे का नाता,
जय जय हें जगदम्बे माता,
जय जय हे जगदम्बे माता।।

जब जब जिसने तुझको पुकारा,
जब जब जिसने तुझको पुकारा,
तूने दिया है बढ़के सहारा,
हर भूले राही को तेरा,
प्यार ही राह दिखाता,
जय जय हें जगदम्बे माता,
जय जय हे जगदम्बे माता।।

जय जय हे जगदम्बे माता,
द्वार तिहारे जो भी आता,
बिन माँगे सबकुछ पा जाता,
जय जय हें जगदम्बे माता,
जय जय हे जगदम्बे माता।।

https://www.youtube.com/watch?v=SHGqHqbQj6E

 

 

 

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