जबलपुर में पिता ने मासूम बेटी की पटककर हत्या कर दी

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मध्यप्रदेश के जबलपुर में एक व्यक्ति ने शराब के नशे में अपनी डेढ़ वर्षीय मासूम बेटी की जमीन पर पटककर हत्या कर दी। इस वारदात को आरोपी की बड़ी बेटी ने देखा। पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार कर लिया, बाद में पुलिस के कहने पर चश्मदीद बेटी ने पिता को कई तमाचे मारे। पुलिस के अनुसार, विजय नगर थाना क्षेत्र में एक शराबी युवक अज्जू वर्मन ने गुरुवार की रात अपनी डेढ़ साल की मासूम बेटी को सिर के बल पटक दिया, जिससे उसकी मौत हो गई। युवक की पत्नी अस्पताल में भर्ती थी। रात के समय युवक शराब पीकर आया था। उस समय उसकी छोटी बेटी रो रही थी। युवक ने मंझली बेटी को पीटा और छोटी बेटी को सिर के बाल पटक दिया।

पुलिस ने आरोपी को शुक्रवार को गिरफ्तार कर लिया। आरोपी की चश्मदीद बेटी ने पुलिस अधीक्षक अमित सिंह के सामने पूरा घटनाक्रम बताया। उसने बताया कि पिता ने किस तरह उसकी छोटी बहन को जमीन पर पटक दिया। बाद में पुलिस अधीक्षक की मौजूदगी में बेटी ने पिता को कई तमाचे जड़े।

अतिरिक्त पुलिस आीक्षक संजीव कुमार ने संवाददाताओं को बताया कि आरोपी की पहचान अज्जू उर्फ रमेश वर्मन के रूप में हुई है। रमेश मूलत: शहडोल का रहने वाला है और पिछले कुछ समय से दीन दयाल चौक के समीप झोपड़ी बनाकर परिवार के साथ रहता था।

न्यूज स्त्रोत आईएएनएस


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बहुत ही मुश्किल है अपने बारे में लिखना । इसलिए ज्यादा कुछ नहीं, मैं बहुत ही सरल व्यतित्व का व्यक्ति हूं । खुशमिजाज हूं ए इसलिए चेहरे पर हमेशा खुशी रहती हैए और मुझे अकेला रहना ज्यादा पंसद है। मेरा स्वभाव है कि मेरी बजह से किसी का कोई नुकसान नहीं होना चाहिए और ना ही किसी का दिल दुखना चाहिए। चाहे वो व्यक्ति अच्छा हो या बुरा। मेरे इस स्वभाव के कारण कभी कभी मुझे खामियाजा भी भुगतान पड़ता है। मैं अक्सर उनके बारे में सोचकर भुला देता हूं क्योंकि खुश रहने का हुनर सिर्फ मेरे पास है। मेरी अपनी विचारए विचारधारा है जिसे में अभिव्यक्त करता रहता हूं । जिन लोगों के विचारों से कभी प्रभावित भी होता हूं तो उन्हें फोलो कर लेता हूं । अभी सफर की शुरुआत है मैने कंप्यूटर ऑफ माटर्स की डिग्री हासिल की है और इस मीडीया क्षेत्र में अभी नया हूं। मगर मुझे अब इस क्षेत्र में काम करना अच्छा लग रहा है। और फिर इसी में काम करने का मन बना लेना दूसरों के लिये अश्चर्य पूर्ण होगा। लेकिन इससे पहले और आज भी ब्लागर ने एक मंच दिया चिठ्ठा के रुप में, जहां बिना रोक टोक के आसानी से सबकुछ लिखा या बताया जा सका। कभी कभी मन में उठ रही बातों या भावों को शब्दों में पिरोयाए उनमें खुद की और दूसरों की कहानी कही। कभी उनके द्वारा किसी को पुकाराए तो कभी खुद ही रूठ गया। कई बार लिखने पर भी मन सतुष्ट नहीं हुआ और निरंतर कुछ नया लिखने मन बनता रहता है। अजीब सी बेचैनी जो न जाने क्या करवाएगी और कितना कुछ कर गुजर जाने की तमन्ना लिए निकले हैं इन सफरों, जहां उम्मीद और विश्वास दोनों कायम हैं जो अर्जुन के भांति लक्ष्य को भेद देंगे । मुझे अभी अपने जीवन में बहुत कुछ करना है किसी के सपनों को पूरा करना हैं । अब तो बस मेरा एक ही लक्ष्य हैं कि मैं बस उसके सपने पूरें करू।

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