धरती जैसे ग्रह पर इंसान को जाने में 2.6 करोड़ो साल लगेंगे क्या ऐसा संभव हो सकता है

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जयपुर। धरती से 1400 प्रकाश वर्ष दूर कोई ग्रह धरती से लगभग पांच गुणा द्रव्यमान रखता है और लगभग 60% अधिक विशाल है। पृथ्वी के जैसा पथरीला, चट्टानी और धरती जैसा ऊर्जा धरती जैसे ही दिन तो क्या यह हमारे लिये महत्वपूर्ण है इसकी सबसे बड़ी समस्य ये है कि हम गैस के गोले मे रहने का तरिका नही जानते है। आपको बता दे कि इस ग्रह पर गुरुत्वाकर्षण पृथ्वी से दोगुनी होगा। इससे इंसान को थोड़ी कठिनाई अवश्य हो सकती है लेकिन अन्य सब तथ्यों को ध्यान मे रखते हुये हम मान सकते है कि कम से कम इस ग्रह पर मानव के जीवित रह सकने की सबसे ज्यादा संभावनाये जता सकते है।

लेकिन क्या हम इतनी दूर जा सकते है तो आइये इसकी गणना करते है एक प्रकाश वर्ष का अर्थ होता है, एक वर्ष मे प्रकाश द्वारा तय की गयी दूरी। प्रकाश एक सेकंड मे लगभग तीन लाख किमी दूरी तय करता है तथा एक साल में 95 खरब किमी. की दूरी तय करता है। 1400 प्रकाश वर्ष मतलब  133,000 खरब किमी.। यदि हम अपने सबसे तेज रफ़्तार वाले यान न्यु हारीजोंस की गति को देखे तो वह लगभग 50,000 किमी/घंटा से चलता है तो  इस गति से हमे केप्लर-452b तक पहुँचने मे 2.6 करोड़ वर्ष लग जायेंगे।

इसका मतलब है कि जब तक हम वहां पहुँचेंगे तब तक इंसान खुद ही खत् हो जायेगा और इसकी पता नहीं कितनी ही पीढीयां आ जायेंग। लेकिन यदि हम बेहतर तकनिक विकसित कर ले तो शायद इस को पार करना आसान होगा लेकिन हो सकता है क् तब भी यह यात्रा इतनी आसान नही होगी। यदि हम प्रकाशगति से यात्रा करे तब भी हमे केप्लर-452b तक पहुचने मे 1400 वर्ष लग जायेंगे। इसका अर्थ यह होगा कि यदि हम आज यात्रा प्रारंभ करें तो 3015 मे इस ग्रह पर पहुँच पायेंगे। तो इससे आंदाजा लगा सकते है कि अंतरिक्ष में रहना आसान नहीं है।

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