रंग को लेकर टिप्पणी करना बहुत खतरनाक : नंदिता दास

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अभिनेत्री व फिल्म निर्माता नंदिता दास का कहना है कि भारतीय समाज में गोरी त्वचा की सनक तब से है, जब कोई इस बारे में सोच भी नहीं सकता था। उन्होंने कहा कि त्वचा के रंग को लेकर टिप्पणी करना बहुत ही खतरनाक हो सकता है। ‘मंटो’ की निर्देशक एक बार फिर त्वचा के गहरे रंग पर सामाजिक धाराणाओं को लेकर सामने आई हैं।

वेब कार्यक्रम ‘द गर्ल ट्राइब’ पर बात करते हुए नंदिता ने अभिभावकों को इस तरह के मामलों पर अपने बच्चों के साथ बातचीत करने के बारे में जागरूक होने की जरूरत पर जोर दिया।

नंदिता ने कहा, “वे एक बच्चे की तरह कहेंगे, आपके नैन-नक्श अच्छे हैं, लेकिन खराब बात यह है कि आप काले हो। शुक्र है, मेरे अभिभावकों ने मेरे रंग-रूप के बारे में ऐसा नहीं कहा।”

उन्होंने कहा, “दुर्भाग्यवश, भले ही अभिभावक अपने बच्चों से प्यार करते हों, लेकिन उन्हें नहीं पता कि वे इन चीजों को लगातार कहते रहते हैं कि धूप में बाहर मत जाओ, नहीं तो आप काले हो जाओगे। मुझे लगता है कि गोरी त्वचा को लेकर सनक हमारे समाज में तब से है, जब से हम इस पर सोच भी नहीं सकते थे।”

न्यूज स्त्रोत आईएएनएस


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बहुत ही मुश्किल है अपने बारे में लिखना । इसलिए ज्यादा कुछ नहीं, मैं बहुत ही सरल व्यतित्व का व्यक्ति हूं । खुशमिजाज हूं ए इसलिए चेहरे पर हमेशा खुशी रहती हैए और मुझे अकेला रहना ज्यादा पंसद है। मेरा स्वभाव है कि मेरी बजह से किसी का कोई नुकसान नहीं होना चाहिए और ना ही किसी का दिल दुखना चाहिए। चाहे वो व्यक्ति अच्छा हो या बुरा। मेरे इस स्वभाव के कारण कभी कभी मुझे खामियाजा भी भुगतान पड़ता है। मैं अक्सर उनके बारे में सोचकर भुला देता हूं क्योंकि खुश रहने का हुनर सिर्फ मेरे पास है। मेरी अपनी विचारए विचारधारा है जिसे में अभिव्यक्त करता रहता हूं । जिन लोगों के विचारों से कभी प्रभावित भी होता हूं तो उन्हें फोलो कर लेता हूं । अभी सफर की शुरुआत है मैने कंप्यूटर ऑफ माटर्स की डिग्री हासिल की है और इस मीडीया क्षेत्र में अभी नया हूं। मगर मुझे अब इस क्षेत्र में काम करना अच्छा लग रहा है। और फिर इसी में काम करने का मन बना लेना दूसरों के लिये अश्चर्य पूर्ण होगा। लेकिन इससे पहले और आज भी ब्लागर ने एक मंच दिया चिठ्ठा के रुप में, जहां बिना रोक टोक के आसानी से सबकुछ लिखा या बताया जा सका। कभी कभी मन में उठ रही बातों या भावों को शब्दों में पिरोयाए उनमें खुद की और दूसरों की कहानी कही। कभी उनके द्वारा किसी को पुकाराए तो कभी खुद ही रूठ गया। कई बार लिखने पर भी मन सतुष्ट नहीं हुआ और निरंतर कुछ नया लिखने मन बनता रहता है। अजीब सी बेचैनी जो न जाने क्या करवाएगी और कितना कुछ कर गुजर जाने की तमन्ना लिए निकले हैं इन सफरों, जहां उम्मीद और विश्वास दोनों कायम हैं जो अर्जुन के भांति लक्ष्य को भेद देंगे । मुझे अभी अपने जीवन में बहुत कुछ करना है किसी के सपनों को पूरा करना हैं । अब तो बस मेरा एक ही लक्ष्य हैं कि मैं बस उसके सपने पूरें करू।

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