जानकर हैरानी होगी दुनिया का एक ऐसा शहर जहां पिछले 70 साल से कोई मौत नहीं हुई !

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आज हम आपको जो भी कुछ बताने जा रहे हैं उसको जानकर शायद आप भी चौंक जाएं क्योंकि जो आज हम आपको बताने जा रहे हैं वो कुछ ऐसा ही है । आज हम आपको एक ऐसे शहर के बारे में बताएंगे ​जहां पर करीब 70 सालों से किसी की मौत नहीं हुई हैं । बता दें कि इस शहर का नाम नार्वे हैं । इस शहर में 2000 की आबादी है यहां पर लोगों को मरने की इजाजत नहीं है । यहां पर पिछले 70 साल से कोई मौत नहीं हुई है । और न ही इन 70 सालो में किसी का अंतिम संस्कार किया गया है । इसकी अजीब वजह है कड़ाके की ठंड । इसकी वजह से मरने वाले की डेड बॉडी सालों तक ना वो गलती है ना ही सड़ती है ।

उसका कारण कुछ साल पहले जब वैज्ञानिकों ने एक बॉडी पर यहा के हालात आज़माया तो पाया कि साल 1917 में जिस शख्स की मौत इनफ्लुएंजा की वजह से हुई थी । उसके शरीर में इनफ्लुएंजा के वायरस जस के तस पड़े थे । जब किसी व्यक्ति की मरने वाली हालत हो जाती है या फिर कोई इमरजेंसी केस होता तो उसे हेलिकॉप्टर से देश के दूसरे इलाके में भेज दिया जाता है ताकि उसकी मौत के बाद में उसका अंतिम संस्कार हो सके ।

 


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बहुत ही मुश्किल है अपने बारे में लिखना । इसलिए ज्यादा कुछ नहीं, मैं बहुत ही सरल व्यतित्व का व्यक्ति हूं । खुशमिजाज हूं ए इसलिए चेहरे पर हमेशा खुशी रहती हैए और मुझे अकेला रहना ज्यादा पंसद है। मेरा स्वभाव है कि मेरी बजह से किसी का कोई नुकसान नहीं होना चाहिए और ना ही किसी का दिल दुखना चाहिए। चाहे वो व्यक्ति अच्छा हो या बुरा। मेरे इस स्वभाव के कारण कभी कभी मुझे खामियाजा भी भुगतान पड़ता है। मैं अक्सर उनके बारे में सोचकर भुला देता हूं क्योंकि खुश रहने का हुनर सिर्फ मेरे पास है। मेरी अपनी विचारए विचारधारा है जिसे में अभिव्यक्त करता रहता हूं । जिन लोगों के विचारों से कभी प्रभावित भी होता हूं तो उन्हें फोलो कर लेता हूं । अभी सफर की शुरुआत है मैने कंप्यूटर ऑफ माटर्स की डिग्री हासिल की है और इस मीडीया क्षेत्र में अभी नया हूं। मगर मुझे अब इस क्षेत्र में काम करना अच्छा लग रहा है। और फिर इसी में काम करने का मन बना लेना दूसरों के लिये अश्चर्य पूर्ण होगा। लेकिन इससे पहले और आज भी ब्लागर ने एक मंच दिया चिठ्ठा के रुप में, जहां बिना रोक टोक के आसानी से सबकुछ लिखा या बताया जा सका। कभी कभी मन में उठ रही बातों या भावों को शब्दों में पिरोयाए उनमें खुद की और दूसरों की कहानी कही। कभी उनके द्वारा किसी को पुकाराए तो कभी खुद ही रूठ गया। कई बार लिखने पर भी मन सतुष्ट नहीं हुआ और निरंतर कुछ नया लिखने मन बनता रहता है। अजीब सी बेचैनी जो न जाने क्या करवाएगी और कितना कुछ कर गुजर जाने की तमन्ना लिए निकले हैं इन सफरों, जहां उम्मीद और विश्वास दोनों कायम हैं जो अर्जुन के भांति लक्ष्य को भेद देंगे । मुझे अभी अपने जीवन में बहुत कुछ करना है किसी के सपनों को पूरा करना हैं । अब तो बस मेरा एक ही लक्ष्य हैं कि मैं बस उसके सपने पूरें करू।

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