इसरो के वैज्ञानिकों ने विकसित किया कृत्रिम दिल, जानियें कैसे

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जयपुर। भारत को प्राचीन समय में विश्व गुरु माना जाता है इसका कारण था की यहां प्रतिभा की शक्ति को पूरी दुनिया सलाम करती थी। आज भी दुनिया में भारतीय प्रतिभा किसी पहचान की मोहताज नहीं है इसको सारा जहांन मानता है।  और सबसे अच्छी बात ये है कि अमेरिका के सबसे बेहतरीन वैज्ञानिक और डॉक्टर भारतीय मूल के ही हैं। इसी तरह से स्वदेशी प्रतिभा की बात करे तो इसरो यह काम बखूबी निभा रहा है। इसी प्रतिभा को दिखाते हुये इसरो के वैज्ञानिकों ने एक बड़ी कामयाबी हासिल की है।

इस शोध से इसरो ने अंतरिक्ष में ही नहीं बल्कि चिकित्सा के क्षेत्र में यह कामयाबी हासिल की है। आपको बता दे कि इसरो के शोधकर्ताओं ने हाल ही में एक कृत्रिम दिल विकसित किया है। इसी खास बात ये है कि इसरो के वैज्ञानिकों ने इस किफायती कृत्रिम दिल को रॉकेट टैक्नोलॉजी से विकसित किया है। वैज्ञानिकों का मानना है कि ये कृत्रिम दिल आने वाले समय में दिल के मरीजों के लिए संजीवनी बूटी जैसा काम करेगा। फिलहाल तो इस आर्टिफिशियल दिल का प्रयोग परीक्षण के लिए सूअर पर किया गया है जो पूरी तरह से सफल रहा है। इसरो की इस नई उपलब्धि के लिए पूरी दुनिया ने भारतीय वैज्ञानिकों को शाबासी दी है सारी वैज्ञानिक इस खोज कि तारीफ रह रहे है।

इसकी कामयाबी को देखते हुए वैज्ञानिक जल्द ही इस कृत्रिम दिल का विकास इंसान के लिए भी किया जायेगा। बता दे कि अब तक रॉकेट तकनीक का इस्तेमाल केवल अंतिरक्ष में भेजे जाने वाले उपकरणों में ही किया जाता था। ऐसा पहली बार किसी अंतरिक्ष एजेंसी ने ऐसा करिश्मा करके दिखाया है। वैज्ञानिकों ने कहा कि इस कृत्रिम दिल की कीमत भी ज्यादा नहीं रहेगी इसको केवल मात्र सवा लाख रुपए में यह उपलब्ध करवा दिया जाएगा।

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