आईएसएल : एटीके के फारवर्ड कालु उचे 6 सप्ताह के लिए मैदान से बाहर

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इंडियन सुपर लीग (आईएसएल) की टीम एटीके के फारवर्ड कालु उचे चोट के चलते छह सप्ताह के लिए लीग से बाहर हो गए हैं। फुटबाल क्लब एटीके के कोच स्टीव कोपेल ने शुक्रवार को यह जानकारी दी।

कोपेल ने संवाददाता सम्मेलन में कहा, “उनके मांसपेशियों में गंभीर चोट है। यह ग्रेड तीन की है जो काफी खराब है। हम उम्मीद करते हैं कि कालु क्रिसमस के आसपास तक फिट हो जाएंगे। उनकी जगह एक खिलाड़ी की तलाश कर रहे हैं जो इस मैच के बाद पांच मैचों में उनकी जगह ले सकें।” कोपेल ने बताया कि नाइजीरिया के खिलाड़ी कालु चिकित्सा उपचार के लिए बार्सिलोना गए हैं। 36 वर्षीय कालु ने एटीके के लिए पांच मैचों में एक गोल किया है।

कालु को 31 अक्टूबर को बेंगलुरू एफसी के खिलाफ खेले गए मैच में अल्बर्ट सेरान से टक्कर लगने के बाद चोट लग गई थी। एटीके को इस मैच में 1-2 से हार का सामना करना पड़ा था।

दो बार के पूर्व चैंपियन एटीके को अब तक तीन मैचों में मात खानी पड़ी है और ये सभी हार उसे घर में मिली है।

एटीके दो जीत और एक ड्रॉ के साथ अंक तालिका में सातवें स्थान पर है।

न्यूज स्त्रोत आईएएनएस


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बहुत ही मुश्किल है अपने बारे में लिखना । इसलिए ज्यादा कुछ नहीं, मैं बहुत ही सरल व्यतित्व का व्यक्ति हूं । खुशमिजाज हूं ए इसलिए चेहरे पर हमेशा खुशी रहती हैए और मुझे अकेला रहना ज्यादा पंसद है। मेरा स्वभाव है कि मेरी बजह से किसी का कोई नुकसान नहीं होना चाहिए और ना ही किसी का दिल दुखना चाहिए। चाहे वो व्यक्ति अच्छा हो या बुरा। मेरे इस स्वभाव के कारण कभी कभी मुझे खामियाजा भी भुगतान पड़ता है। मैं अक्सर उनके बारे में सोचकर भुला देता हूं क्योंकि खुश रहने का हुनर सिर्फ मेरे पास है। मेरी अपनी विचारए विचारधारा है जिसे में अभिव्यक्त करता रहता हूं । जिन लोगों के विचारों से कभी प्रभावित भी होता हूं तो उन्हें फोलो कर लेता हूं । अभी सफर की शुरुआत है मैने कंप्यूटर ऑफ माटर्स की डिग्री हासिल की है और इस मीडीया क्षेत्र में अभी नया हूं। मगर मुझे अब इस क्षेत्र में काम करना अच्छा लग रहा है। और फिर इसी में काम करने का मन बना लेना दूसरों के लिये अश्चर्य पूर्ण होगा। लेकिन इससे पहले और आज भी ब्लागर ने एक मंच दिया चिठ्ठा के रुप में, जहां बिना रोक टोक के आसानी से सबकुछ लिखा या बताया जा सका। कभी कभी मन में उठ रही बातों या भावों को शब्दों में पिरोयाए उनमें खुद की और दूसरों की कहानी कही। कभी उनके द्वारा किसी को पुकाराए तो कभी खुद ही रूठ गया। कई बार लिखने पर भी मन सतुष्ट नहीं हुआ और निरंतर कुछ नया लिखने मन बनता रहता है। अजीब सी बेचैनी जो न जाने क्या करवाएगी और कितना कुछ कर गुजर जाने की तमन्ना लिए निकले हैं इन सफरों, जहां उम्मीद और विश्वास दोनों कायम हैं जो अर्जुन के भांति लक्ष्य को भेद देंगे । मुझे अभी अपने जीवन में बहुत कुछ करना है किसी के सपनों को पूरा करना हैं । अब तो बस मेरा एक ही लक्ष्य हैं कि मैं बस उसके सपने पूरें करू।

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