ISL-7 (सेमीफाइनल-1, सेकेंड लेग) : पेनाल्टी शूटआउट में गोवा को हराकर मुम्बई पहली बार फाइनल में

0

मुम्बई सिटी एफसी ने सोमवार को पहली बार हीरो इंडियन सुपर लीग (आईएसएल) के फाइनल में जगह बना ली। मुम्बई ने बोम्बोलिम के जीएमसी स्टेडिमय में खेले गए सातवें सीजन के पहले सेमीफाइनल के दूसरे लेग में पेनाल्टी शूटआउट में एफसी गोवा को 6-5 से हराया। मुम्बई और गोवा के बीच पहले सेमीफाइनल के फस्र्ट लेग का मुकाबला 2-2 से ड्रॉ रहा था और पहले सेमीफाइनल के दूसरे लेग में भी निर्धारित समय तक स्कोर बराबर रहा। इसके बाद 30 मिनट का एक्सट्रा टाइम में जोड़ा गया। वहां भी गोल नहीं होने के बाद पेनाल्टी शूटआउट का सहारा लिया गया, जहां मुम्बई ने गोवा को 6-5 से हरा दिया।

शूटआउट भी काफी रोचक रहा। शुरुआती पांच-पांच मौकों पर दोनों टीमें 2-2 गोल ही कर सकीं। इसके बाद दोनों को पांच-पांच मौके और मिले लेकिन यहां मुम्बई ने अंतर पैदा कर दिया। शुरुआती 3-3 मौकों पर तो दोनों टीमों ने गोल किए लेकिन गोवा के खिलाड़ी के चौथे मौके पर चूकने के बाद रोवलिन बोर्जेस ने मुम्बई के लिए जीत दिलाने वाला गोल किया।

बहरहाल, शुरुआती 15 मिनट तक दोनों टीमों के बीच कड़ी प्रतिस्पर्धा देखने को मिली। हालांकि इसके चार मिनट बाद ही मुम्बई सिटी एफसी के विग्नेश दक्षिणमूर्ति को मैच का पहला पीला कार्ड दिखाया गया।

26वें मिनट में अल्बटरे नोगुएरा ने बॉल को अपने कब्जे में लेने की कोशिश, लेकिन जॉर्ज आर्टिज ऑफसाइड पाए गए। अगले ही मिनट में गोवा बढ़त लेने का मौका गंवा बैठी। एफसी गोवा ने 34वें मिनट में भी एक बेहतरीन मूव बनाया। लेकिन इस बार भी कप्तान और गोलकीपर अमरिंदर सिंह ने ओर्टिज के शॉट को शानदार तरीके से सेव करके मुम्बई को मैच में बनाए रखा।

दोनों टीमों ने आगे भी एक-दूसरे के गोलकीपर को छकाने की पूरी कोशिश की, लेकिन वे एक-दूसरे के डिफेंस में सेंध नहीं लगा पाए और पहला हाफ गोलरहित रहा। इस सीजन में दोनों टीमें नौवीं बार पहले हाफ में गोल करने में विफल रही।

दूसरे हाफ में गोवा रेडीम की जगह इशान पंडिता के साथ उतरी। 55वें मिनट में सेवियर गामा ने इदु बेदिया के असिस्ट पर बॉक्स के बाहर से एक शानदार शॉट लगाया। लेकिन अमरिंदर ने इसे उतने ही अच्छे तरीके से सेव करके गोवा को बढ़त लेने से रोक दिया।

अमरिंदर ने फिर 62वें मिनट में भी गोवा के एक और हमले को विफल करके मुम्बई को मुकाबले में पीछे नहीं होने दिया। मुम्बई भी बढ़त लेने की कोशिश में लगी हुई थी और इसी प्रयास में हुगो बोउमस ने 70वें मिनट में एक अच्छा मूव बनाया, लेकिन वे इसमें कामयाब नहीं हो पाए।

हालांकि निर्धारित समय तक भी दोनों ही टीमें बढ़त नहीं ले पाई और मुकाबला इंजुरी टाइम में चला गया। चार मिनट के इंजुरी टाइम में मुम्बई सिटी एफसी और एफसी गोवा बढ़त नहीं ले पाई। इसके बाद एक्सट्रा टाइम के रूप में 15-15 मिनट के दो हाफ और जोड़े गए।

एक्सट्रा टाइम में मुम्बई के मंदर राव देसाई को येलो कार्ड मिला। लेकिन एक्सट्रा टाइम के पहले हाफ में भी टीमों की डिफेंस दीवार बनकर खड़ी रही और गोल नहीं खाई। दूसरे हाफ में गोवा के गोलकीपर धीरज सिंह एक बेहतरीन सेव करने के प्रयास में चोटिल हो गए। हालांकि फिर वह उठ खड़े हुए और गौर्स के दीवार बनकर खड़े रहे।

गोवा ने हालांकि बाद में धीरज की जगह नवीन कुमार को गोलकीपर के रूप में मैदान पर उतारा। 30 मिनट के एक्सट्रा टाइम में भी दोनों टीमें गोल नहीं दाग पाई और मुकाबला पेनाल्टी शूटआउट में चला गया।

पेनाल्टी शूटआउट में मुम्बई सिटी एफसी ने अमरिंदर की जगह फुरबा लाचेंपा को गोलकीपर के रूप में उतारा। पेनाल्टी शूटआउट में मुम्बई सिटी एफसी के लिए ओग्बेचे, रेनियर फर्नाडीज, रेनवेड, मातोर्डा फाल, मंदर राव देसाई और रॉवलिन बोर्जेस ने गोल किए। वहीं, एफसी गोवा के लिए इगोर एंगुलो, इवान गोंजालेज, इशान पंडिता, जॉर्ज ओर्टिज और आदिल खान ने गोल दागे।

न्यूज स़ोत आईएएनएस

SHARE
Previous articleSona Mahapatra ने ट्रोलर को दिया करारा जवाब
Next articleBengal Election : पूर्व आईपीएस भारती घोष गिरफ्तारी वारंट पर रोक को सुप्रीम कोर्ट पहुंचीं
बहुत ही मुश्किल है अपने बारे में लिखना । इसलिए ज्यादा कुछ नहीं, मैं बहुत ही सरल व्यतित्व का व्यक्ति हूं । खुशमिजाज हूं ए इसलिए चेहरे पर हमेशा खुशी रहती हैए और मुझे अकेला रहना ज्यादा पंसद है। मेरा स्वभाव है कि मेरी बजह से किसी का कोई नुकसान नहीं होना चाहिए और ना ही किसी का दिल दुखना चाहिए। चाहे वो व्यक्ति अच्छा हो या बुरा। मेरे इस स्वभाव के कारण कभी कभी मुझे खामियाजा भी भुगतान पड़ता है। मैं अक्सर उनके बारे में सोचकर भुला देता हूं क्योंकि खुश रहने का हुनर सिर्फ मेरे पास है। मेरी अपनी विचारए विचारधारा है जिसे में अभिव्यक्त करता रहता हूं । जिन लोगों के विचारों से कभी प्रभावित भी होता हूं तो उन्हें फोलो कर लेता हूं । अभी सफर की शुरुआत है मैने कंप्यूटर ऑफ माटर्स की डिग्री हासिल की है और इस मीडीया क्षेत्र में अभी नया हूं। मगर मुझे अब इस क्षेत्र में काम करना अच्छा लग रहा है। और फिर इसी में काम करने का मन बना लेना दूसरों के लिये अश्चर्य पूर्ण होगा। लेकिन इससे पहले और आज भी ब्लागर ने एक मंच दिया चिठ्ठा के रुप में, जहां बिना रोक टोक के आसानी से सबकुछ लिखा या बताया जा सका। कभी कभी मन में उठ रही बातों या भावों को शब्दों में पिरोयाए उनमें खुद की और दूसरों की कहानी कही। कभी उनके द्वारा किसी को पुकाराए तो कभी खुद ही रूठ गया। कई बार लिखने पर भी मन सतुष्ट नहीं हुआ और निरंतर कुछ नया लिखने मन बनता रहता है। अजीब सी बेचैनी जो न जाने क्या करवाएगी और कितना कुछ कर गुजर जाने की तमन्ना लिए निकले हैं इन सफरों, जहां उम्मीद और विश्वास दोनों कायम हैं जो अर्जुन के भांति लक्ष्य को भेद देंगे । मुझे अभी अपने जीवन में बहुत कुछ करना है किसी के सपनों को पूरा करना हैं । अब तो बस मेरा एक ही लक्ष्य हैं कि मैं बस उसके सपने पूरें करू।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here