आईएसएल-5 : भेके ने गलती की भरपाई कर बेंगलुरू को दिलाए 3 अंक

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बेंगलुरू एफसी ने शुक्रवार को श्री कांतिरावा स्टेडियम में खेले गए हीरो इंडियन सुपर लीग (आईएसएल) के पांचवें सीजन के अपने आठवें मुकाबले में एफसी पुणे सिटी को 2-1 से हराते हुए अंक तालिका के शीर्ष पर अपनी स्थिति मजबूत कर ली है। यह मैच बेंगलुरू के राहुल भिके को याद रहेगा। बेंगलुरू ने 11वें मिनट में उदांता सिंह द्वारा किए गए गोल की मदद से 1-0 की बढ़त हासिल कर ली थी लेकिन भिके ने 15वें मिनट में एक आत्मघाती गोल कर पुणे को बराबरी दिला दी।

इसके बाद अगले 73 मिनट तक कोई गोल नहीं हुआ। बेंगलुरू की टीम भेके की गलती के कारण अपने घर में अंक बांटने को मजबूर दिखाई दे रही थी लेकिन तभी भिके ने अपनी तमाम गलतियों की भरपाई करते हुए 88वें मिनट में गोल कर बेंगलुरू को 2-1 की बढ़त दिला दी जो अंत तक कायम रही।

इस मैच से मिले तीन अंकों के साथ बेंगलुरू के आठ मैचों से 22 अंक हो गए हैं और उसने 17 अंकों के साथ दूसरे स्थान पर काबिज एफसी गोवा पर पांच अंकों की बढ़त बना ली है। यह बेंगलुरू की इस सीजन की सातवीं जीत है। दूसरी ओर, पुणे की 10 मैचों में यह सातवीं हार है। वह अंक तालिका में नौवें स्थान पर है।

नौ मैचों में सिर्फ एक जीत हासिल कर सकने वाली पुणे की टीम ने तालिका में शीर्ष पर चल रही बेंगलुरू के खिलाफ धमाकेदार शुरूआत की। पहले ही मिनट में आशिक कुरुनियन के नाकाम रहने के बाद मार्सेलिन्हो और मार्को स्टैनकोविक ने भी कुछ अच्छे मूव बनाए।

लेकिन, वे टीम को सफलता नहीं दिला सका। पहला गोल मेजबानों के नाम लिखा था और उदांता सिंह ने 11वें मिनट में हर्मनजोत खाबरा के पास पर गोल करते हुए उसे 1-0 से आगे कर दिया।

उदांता गेंद लेकर बाक्स में गए और कुछ खिलाड़ियों को छकाते हुए गोलकीपर कमलजीत के पास पहुंच गए और फिर अपने बाएं पैर से कर्ल करते हुए अपनी टीम को पहली सफलता दिला दी।

कमलजीत ने 13वें मिनट में एक बेहतरीन बचाव करते हुए बेंगलुरू को 2-0 से आगे होने से रोक दिया। बेंगलुरू के लिए सबकुछ बहुत अच्छा चल रहा था लेकिन 15वें मिनट में राहुल भेके वह गलती कर बैठे, जिसकी किसी को उम्मीद नहीं थी। भेके ने आत्मघाती गोल करते हुए पुणे को बराबरी दिला दी।

यह गोल मार्सेलिन्हो द्वारा बनाए गए मूव का नतीजा था। अगेंस्ट द रन आफ प्ले पर मार्सेलिन्हो ने स्टैनकोविक को दाएं किनारे से एक अच्छा लो पास दिया। स्टैनकोविक की नजर में रोबिन सिंह थे, जो उस समय अच्छी स्थिति में थे। गेंद उनके पास पहुंचती, उससे पहले भेके ने अपना पैर उस पर लगा दिया और उनका दुर्भाग्य था कि गेंद पोस्ट के अंदर चली गई। मैच में 1-1 की बराबरी हो चुकी थी।

भेके के आत्मघाती गोल के बाद बेंगलुरू ने लीड लेने के सभी प्रयास किए लेकिन उसे सफलता नही मिली। पुणे का डिफेंस सचेत हो गया था और पहली गलती के बाद कमलजीत ने अच्छा खेल दिखाया। इस तरह पहला हाफ 1-1 की बराबरी पर खत्म हुआ।

कमलजीत ने दूसरे हाफ में 46वें और 48वे मिनट में बेंगलुरू के दो अच्छे मूव विफल किए। इसके एक मिनट ही पुणे को कार्नर मिला, जिसे मार्सेलिन्हो ने लिया और उस पर मैट मिल्स ने एक बेहतरीन हेडर के जरिए गोल करना चाहा लेकिन गुरप्रीत सावधान थे।

बेंगलुरू के सुनील छेत्री अपनी टीम को तीन अंक दिलाने के लिए लगातार प्रयास करते रहे लेकिन पुणे का डिफेंस मजबूती से उनके दावों को खारिज कर रहा था।

बेंगलुरू ने 66वें मिनट में पहला बदलाव करते हुए चेचनो को बाहर किया और सेम्बोई हाओकिप अंदर लिए गए। खेल कुछ धीमा हो चला था। ऐसा लगा कि बेंगलुरू टीम अंक बांटने को मजबूर होगी लेकिन तभी भेके ने खाबरा के पास पर गोल करते हुए अपनी गलती की भरपाई कर डाली। इस गोल में नीशू कुमार की भी अहम भूमिका रही क्योंकि खाबरो को पास उन्होंने ही दिया था।

90वें मिनट में मार्सेलिन्हो को पीला कार्ड मिला। अंतिम पलों में दोनों टीमों ने कुछ बदलाव किए लेकिन स्कोर बेंगलुरू के पक्ष में 2-1 बना रहा।

न्यूज स्त्रोत आईएएनएस


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बहुत ही मुश्किल है अपने बारे में लिखना । इसलिए ज्यादा कुछ नहीं, मैं बहुत ही सरल व्यतित्व का व्यक्ति हूं । खुशमिजाज हूं ए इसलिए चेहरे पर हमेशा खुशी रहती हैए और मुझे अकेला रहना ज्यादा पंसद है। मेरा स्वभाव है कि मेरी बजह से किसी का कोई नुकसान नहीं होना चाहिए और ना ही किसी का दिल दुखना चाहिए। चाहे वो व्यक्ति अच्छा हो या बुरा। मेरे इस स्वभाव के कारण कभी कभी मुझे खामियाजा भी भुगतान पड़ता है। मैं अक्सर उनके बारे में सोचकर भुला देता हूं क्योंकि खुश रहने का हुनर सिर्फ मेरे पास है। मेरी अपनी विचारए विचारधारा है जिसे में अभिव्यक्त करता रहता हूं । जिन लोगों के विचारों से कभी प्रभावित भी होता हूं तो उन्हें फोलो कर लेता हूं । अभी सफर की शुरुआत है मैने कंप्यूटर ऑफ माटर्स की डिग्री हासिल की है और इस मीडीया क्षेत्र में अभी नया हूं। मगर मुझे अब इस क्षेत्र में काम करना अच्छा लग रहा है। और फिर इसी में काम करने का मन बना लेना दूसरों के लिये अश्चर्य पूर्ण होगा। लेकिन इससे पहले और आज भी ब्लागर ने एक मंच दिया चिठ्ठा के रुप में, जहां बिना रोक टोक के आसानी से सबकुछ लिखा या बताया जा सका। कभी कभी मन में उठ रही बातों या भावों को शब्दों में पिरोयाए उनमें खुद की और दूसरों की कहानी कही। कभी उनके द्वारा किसी को पुकाराए तो कभी खुद ही रूठ गया। कई बार लिखने पर भी मन सतुष्ट नहीं हुआ और निरंतर कुछ नया लिखने मन बनता रहता है। अजीब सी बेचैनी जो न जाने क्या करवाएगी और कितना कुछ कर गुजर जाने की तमन्ना लिए निकले हैं इन सफरों, जहां उम्मीद और विश्वास दोनों कायम हैं जो अर्जुन के भांति लक्ष्य को भेद देंगे । मुझे अभी अपने जीवन में बहुत कुछ करना है किसी के सपनों को पूरा करना हैं । अब तो बस मेरा एक ही लक्ष्य हैं कि मैं बस उसके सपने पूरें करू।

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