क्या पार्टी में लालू यादव से भी ऊंचा कद हो चुका है तेजस्वी यादव का?

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फाइल फोटो

बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री लालू प्रसाद यादव के जेल जाने से बाद से राज्य के सबसे बड़े विपक्षी दल राष्ट्रीय जनता दल का नेतृत्व तेजस्वी यादव ही कर रहे हैं। हालांकि लालू अभी भी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं, पर फिर भी जेल से तो कोई पार्टी का काम नहीं ही देख सकता है। लालू के दो बेटों तेजस्वी और तेजप्रताप यादव तेज़ी से राजनीति के मुख्य धारा में प्रवेश कर रहे हैं।

ऐसे में जब अभी देश में राजनीतिक माहौल बनने लगा है, बिहार से देश भर के विपक्षी पार्टियों के तेजस्वी यादव से काफी कुछ उम्मीदें हैं। सोनिया गांधी ने आज विपक्षी दलों की मीटिंग बुलाई है, जिसमें तेजस्वी के भी शामिल होने की संभावना है। इसके बाद 23 मार्च को राज्यसभा चुनाव होने हैं, जिसमें बिहार की भी 6 खाली सीटों पर चुनाव होना है।

हालांकि इन 6 राज्यसभा सीटों के लिए भाजपा, जदयू, कांग्रेस और राजद के उम्मीदवार निर्विरोध जीतने वाले हैं, क्योंकि इनके खिलाफ किसी ने नामांकन नहीं किया है। जेडीयू के तरफ से जो दो नामों की घोषणा हुई है, वो हैं किंग महेंद्र और वशिष्ठ नारायण सिंह। वहीं भाजपा के खाते में इस बार बिहार से बस एक ही सीट राज्यसभा के लिए आने वाली है और उसमें भाजपा ने रविशंकर प्रसाद का नाम घोषित कर दिया है।

बात अगर राजद की करें तो तेजस्वी यादव का बढ़ता हुआ कद राजद में साफ दिखाई दे रहा है। पार्टी के अंदर से कई नाम सामने आ रहे थे। यहां तक कि ये भी कहा गया कि जेल में बंद लालू से भी इस चुनाव के लिए राय मांगी गई है। उम्मीद की जा रही थी कि लालू के करीबी जगदानंद सिंह, रघुवंश प्रसाद सिंह और शिवानंद तिवारी जैसे लोगों को राज्यसभा का टिकट दिया जा सकता है।

लेकिन चली सिर्फ तेजस्वी की। राजद की तरफ से राज्यसभा का उम्मीदवार बनाया गया है, मनोज झा और अशफाक करीम को। ये दोनों ही तेजस्वी के करीबी माने जाते हैं। मनोज झा ने लालू को जेल होने के समय एक बड़े लालू समर्थक के तरह केंद्र सरकार की आलोचना भी की थी। मनोज झा के ज़रिये तेजस्वी राज्य के ब्राह्मण वोट को भी आकर्षित करना चाह रहे होंगे। इसके अलावा अशफाक करीम बिहार के कटिहार से आते हैं और अल्पसंख्यकों के बीच उनकी काफी लोकप्रियता है।    

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