क्या ममता बनर्जी को चारों तरफ से भाजपा ने घेर लिया है?

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पश्चिम बंगाल। एक वक्त पर कम्युनिस्टों का गढ़। कम्युनिस्ट मतलब मार्क्सवादी। दशकों तक बंगाल में शासन किया। फिर आई हवाई चप्पल पहन कर आने वाली एक सीधी सादी दिखने वाली महिला। नाम है ममता बनर्जी। उखाड़ फेंका की लेफ्ट की पुरानी सरकार को। ऐसा हाल किया कि बंगाल में अब तक पानी पी रहे हैं लेफ्ट वाले। कोई चैलेंज देने वाला बचा ही नहीं। लोकसभा से लेकर विधानसभा चुनावों तक एकक्षत्र ममता बनर्जी की त्रिणमूल कांग्रेस ने बंगाल में अपना परचम लहराया और अब तक लहरा भी रहे हैं। ममता बनर्जी यूपीए की शासनकाल में रेल मंत्री भी रहीं। फिर चुनाव जीतने के बाद बन गईं पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री। उसके बाद वापस से 2016 में विधानसभा चुनाव जीता और फिर बन गईं मुख्यमंत्री।

जब तक ममता पहले टर्म में बंगाल की मुख्यमंत्री रहीं, सब सही चला। दूसरी बार मुख्यमंत्री बनने से पहले केंद्र सरकार में परिवर्तन हो गया। भाजपा ने एकतरफा 2014 में आम चुनाव में जीत हासिल कर ली। हालांकि इससे ममता को बंगाल में कोई फर्क नहीं पड़ा। 42 में से 34 सीट त्रिणमूल कांग्रेस ने जीत ली। भाजपा और वाम मोर्चे के खाते में गईं 2-2 सीटें और कांग्रेस ने हासिल की 2 सीट। मतलब साफ था कि बंगाल ने वापस से ममता को समर्थन दे दिया था।

भाजपा का उत्तर-पूर्वी राज्यों में आगमन

पश्चिम बंगाल के पास देश के 8 उत्तर-पूर्वी राज्य स्थित हैं। इनमें से सिक्किम, मणिपुर, अरुणाचल प्रदेश और असम में भाजपा या भाजपा के सहयोगी दलों की सरकार आ चुकी है। और अभी हाल ही में संपन्न हुए उत्तर-पूर्व के ही तीन राज्यों में विधानसभा चुनावों में भाजपा सत्ता बनाने में कामयाब हो सकती है। इन तीनों राज्यों में हालांकि भाजपा सहयोगी दलों के साथ मिलकर ही सरकार बना सकती है, पर सरकार बनाना तो सरकार बनाना ही होता है।

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इससे ममता बनर्जी को क्या फर्क?

वापस से कहा जाए तो पश्चिम बंगाल चारों तरफ से उत्तर-पूर्व के छोटे-छोटे राज्यों से घिरा हुआ है। इन छोटे-छोटे राज्यों के साथ साथ बंगाल झारखंड और बिहार से भी टच करता है। बिहार और झारखंड में भाजपा या भाजपा के सहयोग से ही सरकार चल रही है। इन सभी राज्यों में जो कि बंगाल के आस-पास हैं, बंगालियों का खासा असर है। बंगाली इन सभी राज्यों में बसे हैं और उन्हें अपने राज्य पश्चिम बंगाल से भी उतना ही प्यार है। अगर बाकी राज्यों में भी भाजपा की सरकार आ गई तो त्रिणमूल कांग्रेस यानि कि ममता बनर्जी की पार्टी को बंगाल में भी असर देखने को मिल सकता है। वैसे भी भाजपा ने इन दो सालों में जितने भी उपचुनाव हुए हैं, कांग्रेस और वाम दलों को पीछे छोड़ते हुए दूसरे नंबर की पोज़िशन हासिल कर ली है।

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