क्या वाकई में इस सृष्टि में प्रति-ब्रह्माण्ड की उपस्थिति संभव है ?

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जयपुर। सोचो अगर किसी वैज्ञानिक गल्प कथा मे नायक अंतरिक्ष मे पृथ्वी के जैसा ग्रह खोज निकालता है। यह नया ग्रह बिल्कुल हर मायनो मे पृथ्वी के जैसा ही होता है बस अंतर इतना होता है कि यह प्रतिपदार्थ से बना होता है। और मान लो कि इस ग्रह पर हमारे जुड़वाँ मौजूद है जो प्रति-मानव प्रति-शहरो मे रहते है और इनके प्रति बच्चे भी है। यही नहीं प्रति-रसायनशास्त्र है लेकिन रसायनशास्त्र के नियम समान है, केवल इसमें इसके आवेश बदल गये है,

इस कारण से प्रति ब्रम्हाण्ड के प्रतिमानवों को पता नही चलता है कि वे प्रति-पदार्थ के बने हुये है। उनकी दृष्टी से हम प्रतिपदार्थ से निर्मित मानव लग सकते है क्योंकि वहां धन आवेश और ऋण आवेश मे अदलाबदली हो गयी है लेकिन अन्य सभी कुछ समान ही है। अंतरिक्ष मे पृथ्वी का जुड़वाँ ग्रह मिलता है जो कि पृथ्वी की दर्पणाकृति है। इस ग्रह मे हर वस्तु का बायां भाग दायें से तथा दायां भाग बांऐ में बदला हुआ है और वे भी कभी यह नही जान पाएंगे कि वे बायेदायें विपरित दर्पण ब्रह्माण्ड मे रहते है।

लेकिन सवाल है यह कि  क्या वाकई में विपरीत C ब्रह्माण्ड या विपरित P ब्रह्माण्ड का अस्तित्व हो सकता है?  अगर न्युटन तथा आइंस्टाइन के समीकरणों को देखते है तो उन पर परामाण्विक कणो के आवेश बदलने से या परामाण्विक कणो के की दाएं और बाएं दिशा की अदलाबदली से कोई अंतर नहीं आता है इसको देखते हुये और न्युटन तथा आइंस्टाइन के समीकरणों के अनुसार सैद्धांतिक रूप से विपरीत C ब्रह्माण्ड या विपरीत P ब्रह्माण्ड का अस्तित्व संभव है।

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