Iranian weightlifter को 8 साल बाद मिला ओलंपिक स्वर्ण

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ईरान के वेटलिफ्टर नवाब नासिरसेलाल को आठ साल के बाद ओलंपिक स्वर्ण पदक प्राप्त हुआ। नासिर को 2012 के लंदन ओलंपिक के लिए स्वर्ण मिला। उस साल वह दूसरे स्थान पर रहे थे लेकिन यूक्रेन के ओलेकसी टोरोखटी को आईओसी द्वारा अयोग्य करार दिए जाने के बाद अब उन्हें सोने का तमगा मिल गया है।

यह सब यूं हुआ कि लंदन 2012 में लिए गए ओलेकसी के सैंपल में प्रतिबंधित दवा का अंश मिला। डोप की सम्भावना को देखते हुए 105 किग्रा के इवेंट का पहले से चौथे स्थान तक का परिणाम होल्ड पर रखा गाय था।

अब जबकि आईओसी ने साफ कर दिया है कि ओलेकसी के सैंपल में प्रतिबंधित दवा का अंश मिला है, तो स्वर्ण पदक नवाब को दिया जाएगा।

रजत पोलैंड के बार्थोमेज बोंक को मिला जबकि कांस्य उजबेकिस्तान के इवान एफरेमोव को दिया गया।

न्यूज स्त्रोत आईएएनएस

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बहुत ही मुश्किल है अपने बारे में लिखना । इसलिए ज्यादा कुछ नहीं, मैं बहुत ही सरल व्यतित्व का व्यक्ति हूं । खुशमिजाज हूं ए इसलिए चेहरे पर हमेशा खुशी रहती हैए और मुझे अकेला रहना ज्यादा पंसद है। मेरा स्वभाव है कि मेरी बजह से किसी का कोई नुकसान नहीं होना चाहिए और ना ही किसी का दिल दुखना चाहिए। चाहे वो व्यक्ति अच्छा हो या बुरा। मेरे इस स्वभाव के कारण कभी कभी मुझे खामियाजा भी भुगतान पड़ता है। मैं अक्सर उनके बारे में सोचकर भुला देता हूं क्योंकि खुश रहने का हुनर सिर्फ मेरे पास है। मेरी अपनी विचारए विचारधारा है जिसे में अभिव्यक्त करता रहता हूं । जिन लोगों के विचारों से कभी प्रभावित भी होता हूं तो उन्हें फोलो कर लेता हूं । अभी सफर की शुरुआत है मैने कंप्यूटर ऑफ माटर्स की डिग्री हासिल की है और इस मीडीया क्षेत्र में अभी नया हूं। मगर मुझे अब इस क्षेत्र में काम करना अच्छा लग रहा है। और फिर इसी में काम करने का मन बना लेना दूसरों के लिये अश्चर्य पूर्ण होगा। लेकिन इससे पहले और आज भी ब्लागर ने एक मंच दिया चिठ्ठा के रुप में, जहां बिना रोक टोक के आसानी से सबकुछ लिखा या बताया जा सका। कभी कभी मन में उठ रही बातों या भावों को शब्दों में पिरोयाए उनमें खुद की और दूसरों की कहानी कही। कभी उनके द्वारा किसी को पुकाराए तो कभी खुद ही रूठ गया। कई बार लिखने पर भी मन सतुष्ट नहीं हुआ और निरंतर कुछ नया लिखने मन बनता रहता है। अजीब सी बेचैनी जो न जाने क्या करवाएगी और कितना कुछ कर गुजर जाने की तमन्ना लिए निकले हैं इन सफरों, जहां उम्मीद और विश्वास दोनों कायम हैं जो अर्जुन के भांति लक्ष्य को भेद देंगे । मुझे अभी अपने जीवन में बहुत कुछ करना है किसी के सपनों को पूरा करना हैं । अब तो बस मेरा एक ही लक्ष्य हैं कि मैं बस उसके सपने पूरें करू।

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