IPL-13 : गौतम ने धोनी पर साधा जमकर निशाना

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आईपीएल में मंगलवार को शारजाह में खेले गए मैच में चेन्नई सुपर किंग्स की 16 रन की हार को लेकर प्रशंसकों में खासा रोष है । इस हार को लेकर पूर्व ओपनर गौतम गंभीर भी शामिल हो गए हैं, जिन्होंने कई पहलुओं को लेकर एमएस धोनी की तीखी आलोचना की है । गंभीर ने पहले एमएस धोनी के सातवें नंबर पर बैटिंग करने आने के फैसले को आड़े लेते हुए कहा कि कोई अगर और कप्तान होता, तो उसकी इस फैसले के लिए बहुत ज्यादा आलोचना झेलनी पड़ती, लेकिन अब वह एमएस धोनी हैं, तो लोग इस क्रम को लेकर ज्यादा बातें नहीं कर रहे हैं ।

इसके आगे गौतम ने कहा कि य​दि मैं ईमानदारी से कहूं, तो मैं तो आश्चर्य में था कि एमएस नंबर-7 पर बैटिंग के लिए उतरे । खुद से पहले सैम कुरेन और रितुराज को क्यों भेजा गया मुझे ये समझ नहीं आया । जब आप 217 रनों का पीछा करते हो और नंबर सात पर आते हो, तो मैच खत्म हो चुका होता है !

 

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बहुत ही मुश्किल है अपने बारे में लिखना । इसलिए ज्यादा कुछ नहीं, मैं बहुत ही सरल व्यतित्व का व्यक्ति हूं । खुशमिजाज हूं ए इसलिए चेहरे पर हमेशा खुशी रहती हैए और मुझे अकेला रहना ज्यादा पंसद है। मेरा स्वभाव है कि मेरी बजह से किसी का कोई नुकसान नहीं होना चाहिए और ना ही किसी का दिल दुखना चाहिए। चाहे वो व्यक्ति अच्छा हो या बुरा। मेरे इस स्वभाव के कारण कभी कभी मुझे खामियाजा भी भुगतान पड़ता है। मैं अक्सर उनके बारे में सोचकर भुला देता हूं क्योंकि खुश रहने का हुनर सिर्फ मेरे पास है। मेरी अपनी विचारए विचारधारा है जिसे में अभिव्यक्त करता रहता हूं । जिन लोगों के विचारों से कभी प्रभावित भी होता हूं तो उन्हें फोलो कर लेता हूं । अभी सफर की शुरुआत है मैने कंप्यूटर ऑफ माटर्स की डिग्री हासिल की है और इस मीडीया क्षेत्र में अभी नया हूं। मगर मुझे अब इस क्षेत्र में काम करना अच्छा लग रहा है। और फिर इसी में काम करने का मन बना लेना दूसरों के लिये अश्चर्य पूर्ण होगा। लेकिन इससे पहले और आज भी ब्लागर ने एक मंच दिया चिठ्ठा के रुप में, जहां बिना रोक टोक के आसानी से सबकुछ लिखा या बताया जा सका। कभी कभी मन में उठ रही बातों या भावों को शब्दों में पिरोयाए उनमें खुद की और दूसरों की कहानी कही। कभी उनके द्वारा किसी को पुकाराए तो कभी खुद ही रूठ गया। कई बार लिखने पर भी मन सतुष्ट नहीं हुआ और निरंतर कुछ नया लिखने मन बनता रहता है। अजीब सी बेचैनी जो न जाने क्या करवाएगी और कितना कुछ कर गुजर जाने की तमन्ना लिए निकले हैं इन सफरों, जहां उम्मीद और विश्वास दोनों कायम हैं जो अर्जुन के भांति लक्ष्य को भेद देंगे । मुझे अभी अपने जीवन में बहुत कुछ करना है किसी के सपनों को पूरा करना हैं । अब तो बस मेरा एक ही लक्ष्य हैं कि मैं बस उसके सपने पूरें करू।

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