IPL-13 : फिर हारी चेन्नई, अकेले लड़े फाफ (राउंडअप)

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महेंद्र सिंह धोनी के नेतृत्व में खेल रही चेन्नई सुपर किंग्स को शुक्रवार को इंडियन प्रीमियर लीग (आईपीएल) के 13वें संस्करण में एक और हार का सामना करना पड़ा। दुबई इंटरनेशनल स्टेडियम में दिल्ली कैपिटल्स ने उसे 44 रनों से हरा दिया। 176 रनों के लक्ष्य का पीछा करने उतरी चेन्नई कभी भी मैच में नहीं दिखी। उसके लिए एक बार फिर सिर्फ फाफ डु प्लेसिस (43) अकेले लड़े। चेन्नई 20 ओवरों में सात विकेट के नुकसान पर 131 रन ही बना सकी।

दिल्ली के गेंदबाजों ने चेन्नई के बल्लेबाजों पर पूरी तरह से अंकुश लगाए रखा। विकेट को भांप दिल्ली के कप्तान श्रेयस अय्यर ने बाएं हाथ के स्पिनर अक्षर पटेल को शुरुआत में ही गेंद थमा दी। इसका फायदा भी उन्हें मिला क्योंकि पटेल ने शेन वाटसन (14) का विकेट दिल्ली को दिला दिया।

मुरली विजय (10) एक बार फिर असफल रहे। छह ओवरों में चेन्नई का स्कोर 34 रनों पर दो विकेट था। दिल्ली के गेंदबाजों ने चेन्नई की रनगति को ज्यादा बढ़ने नहीं दिया। एक छोर पर खड़े फाफ को समर्थन की जरूरत थी ताकि वह स्कोरबोर्ड को तेजी से चला सकें। रन आ नहीं रहे थे लेकिन विकेट जा रहे थे। रितुराज गायकवाड (5) एक बार फिर उम्मीदों पर खरा नहीं उतरे और रन आउट हुो गए।

10 ओवरों में चेन्नई सिर्फ 47 रन ही बना पाई थी जबिक तीन विकेट उसने खो दिए थे। समय हाथ से निकलता ़जा रहा था और इसी कारण फाफ तेजी से रन बनाने की कोशिश में थे। उन्होंने कोशिश शुरू की और शिमरन हेटमायेर ने उन्हें जीवनदान भी दे दिया। हेटमायेर ने 12वें ओवर की चौथी गेंद पर फाफ का कैच छोड दिया।

गायकवाड का स्थान लेने आए केदार जाधव (26) ने डु प्लेसिस के साथ टीम को जिताने की कोशिश की और रनगति बढ़ाई। एनरिक नोर्टजे ने उनकी पारी को ज्यादा आगे नहीं जाने दिया। यहां से चेन्नई के लिए काफी देर हो चुकी थी और हार से वह बस औपचारिकता मात्र दूर थी। फिर भी डु प्लेसिस ने कोशिश की और लड़ते रहे।

कैगिसो रबादा ने 18वें ओवर में उन्हें पवेलियन भेज चेन्नई का पांचवां विकेट गिरा दाया।

धोनी (15) आखिरी ओवर में आउट हुए। रवींद्र जडेजा (12) मैच की आखिरी गेंद पर पवेलियन लौटे।

दिल्ली के लिए रबादा ने तीन और एनरिक ने दो विकेट लिए।

दिल्ली से पहले चेन्नई के गेंदबाजों ने भी विकेट से मिल रही मदद का फायदा उठाते हुए दिल्ली की सलामी जोड़ी को हाथ खोलने नहीं दिए। पृथ्वी शॉ और शिखर धवन ने पावर प्ले में सिर्फ 36 रन ही बनाए। धीरे-धीरे इन दोनों ने रनगति तेज की और टीम को 10 ओवरों में टीम का स्कोर बिना विकेट के 88 रन कर दिया।

लेग स्पिनर पीयूष चावला ने धवन ( 35 रन, 27 गेंद, 3 चौके, 1 छक्का) को आउट कर चेन्नई को पहली सफलता दिलाई। धवन ने शॉ के साथ पहले विकेट के लिए 94 रनों की साझेदारी की।

इसके बाद श़ॉ (64 रन, 43 रन, 9 चौके, 1 छक्का) भी चावला की गेंद पर धोनी के हाथों स्टम्पिंग कर दिए गए।

ऋषभ पंत से उम्मीद थी कि वह अपने आक्रामक अंदाज में टीम को विशाल स्कोर तक ले जाएंगे और यही उम्मीद कप्तान श्रेयस अय्यर से थी। दोनो ने कोशिशें तो की लेकिन ज्यादा आक्रामकता नहीं दिखा पाए। इन दोनों ने सिर्फ स्कोरबोर्ड को थोड़ी तेजी से चलाए रखा।

अय्यर ( 26 रन, 22 गेंद,1 चौका) सैम कुरैन की गेंद पर धोनी को कैच दे बैठे। पंत ने नाबाद 37 रन बनाए।

दिल्ली ने हालांकि जो स्कोर बनाया था वो विकेट के लिहाज से काफी था और वह आसानी से प्रभावी गेंदबाजी के चलते इसे बचा पाने में भी सफल रही।

न्यूज स्त्रोत आईएएनएस

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बहुत ही मुश्किल है अपने बारे में लिखना । इसलिए ज्यादा कुछ नहीं, मैं बहुत ही सरल व्यतित्व का व्यक्ति हूं । खुशमिजाज हूं ए इसलिए चेहरे पर हमेशा खुशी रहती हैए और मुझे अकेला रहना ज्यादा पंसद है। मेरा स्वभाव है कि मेरी बजह से किसी का कोई नुकसान नहीं होना चाहिए और ना ही किसी का दिल दुखना चाहिए। चाहे वो व्यक्ति अच्छा हो या बुरा। मेरे इस स्वभाव के कारण कभी कभी मुझे खामियाजा भी भुगतान पड़ता है। मैं अक्सर उनके बारे में सोचकर भुला देता हूं क्योंकि खुश रहने का हुनर सिर्फ मेरे पास है। मेरी अपनी विचारए विचारधारा है जिसे में अभिव्यक्त करता रहता हूं । जिन लोगों के विचारों से कभी प्रभावित भी होता हूं तो उन्हें फोलो कर लेता हूं । अभी सफर की शुरुआत है मैने कंप्यूटर ऑफ माटर्स की डिग्री हासिल की है और इस मीडीया क्षेत्र में अभी नया हूं। मगर मुझे अब इस क्षेत्र में काम करना अच्छा लग रहा है। और फिर इसी में काम करने का मन बना लेना दूसरों के लिये अश्चर्य पूर्ण होगा। लेकिन इससे पहले और आज भी ब्लागर ने एक मंच दिया चिठ्ठा के रुप में, जहां बिना रोक टोक के आसानी से सबकुछ लिखा या बताया जा सका। कभी कभी मन में उठ रही बातों या भावों को शब्दों में पिरोयाए उनमें खुद की और दूसरों की कहानी कही। कभी उनके द्वारा किसी को पुकाराए तो कभी खुद ही रूठ गया। कई बार लिखने पर भी मन सतुष्ट नहीं हुआ और निरंतर कुछ नया लिखने मन बनता रहता है। अजीब सी बेचैनी जो न जाने क्या करवाएगी और कितना कुछ कर गुजर जाने की तमन्ना लिए निकले हैं इन सफरों, जहां उम्मीद और विश्वास दोनों कायम हैं जो अर्जुन के भांति लक्ष्य को भेद देंगे । मुझे अभी अपने जीवन में बहुत कुछ करना है किसी के सपनों को पूरा करना हैं । अब तो बस मेरा एक ही लक्ष्य हैं कि मैं बस उसके सपने पूरें करू।

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