IPL 13 : अनिल कुंबले ने विराट कोहली को सिखाया ‘सबक’, नहीं भूल पाएंगे ये हार

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कुंबले के कोच रहते हुए टीम इंडिया को टेस्ट सीरीज़ में वेस्टइंडीज़ में जीत मिली. इसके अलावा भारत ने न्यूजीलैंड, इंग्लैंड, ऑस्ट्रेलिया और बांग्लादेश को हराया । टीम इंडिया लगातार कामयाबी के झंडे गाड़ रही थी. लेकिन 20 जून को 2017 को कुंबले कोच के पद से हट गए । जिसके बाद क्रिकेट जगत में मानों हंगामा मच गया हो. हर तरफ सवाल उठने लगे कि आखिर इस महान क्रिकेटर को क्या हो गया । उन दिनों विराट नहीं चाहते थे कि कुबंले टीम इंडिया के कोच रहे ।

महान क्रिकेटर कुंबले ने विराट के साथ अपने रिश्तों पर कभी भी खुल कर कुछ भी नहीं कहा । मगर 3 साल के बाद विराट को कुंबले ने पंजाब किंग्स इलेवन का कोच रहते हुए सबक सिखा दिया । पिछले साल अक्टूबर में अनिल कुंबले को पंजाब किंग्स इलेवन ने कोच बनाया था ।

इसके बाद से उन्होंने जम कर कर मेहनत की है और कुंबले किस ठोस रणनीति के साथ काम कर रहे हैं इसका अंदाजा आप इस बात से लगा सकते हैं कि क्रिस गेल जैसे विस्फोटक बल्लेबाज़ को वो फिलहाल प्लेइंग इलेवन में जगह नहीं दे रहे हैं । बता दें कि इस बार के आईपीएल में वो एक मात्र भारतीय कोच हैं ।

 

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बहुत ही मुश्किल है अपने बारे में लिखना । इसलिए ज्यादा कुछ नहीं, मैं बहुत ही सरल व्यतित्व का व्यक्ति हूं । खुशमिजाज हूं ए इसलिए चेहरे पर हमेशा खुशी रहती हैए और मुझे अकेला रहना ज्यादा पंसद है। मेरा स्वभाव है कि मेरी बजह से किसी का कोई नुकसान नहीं होना चाहिए और ना ही किसी का दिल दुखना चाहिए। चाहे वो व्यक्ति अच्छा हो या बुरा। मेरे इस स्वभाव के कारण कभी कभी मुझे खामियाजा भी भुगतान पड़ता है। मैं अक्सर उनके बारे में सोचकर भुला देता हूं क्योंकि खुश रहने का हुनर सिर्फ मेरे पास है। मेरी अपनी विचारए विचारधारा है जिसे में अभिव्यक्त करता रहता हूं । जिन लोगों के विचारों से कभी प्रभावित भी होता हूं तो उन्हें फोलो कर लेता हूं । अभी सफर की शुरुआत है मैने कंप्यूटर ऑफ माटर्स की डिग्री हासिल की है और इस मीडीया क्षेत्र में अभी नया हूं। मगर मुझे अब इस क्षेत्र में काम करना अच्छा लग रहा है। और फिर इसी में काम करने का मन बना लेना दूसरों के लिये अश्चर्य पूर्ण होगा। लेकिन इससे पहले और आज भी ब्लागर ने एक मंच दिया चिठ्ठा के रुप में, जहां बिना रोक टोक के आसानी से सबकुछ लिखा या बताया जा सका। कभी कभी मन में उठ रही बातों या भावों को शब्दों में पिरोयाए उनमें खुद की और दूसरों की कहानी कही। कभी उनके द्वारा किसी को पुकाराए तो कभी खुद ही रूठ गया। कई बार लिखने पर भी मन सतुष्ट नहीं हुआ और निरंतर कुछ नया लिखने मन बनता रहता है। अजीब सी बेचैनी जो न जाने क्या करवाएगी और कितना कुछ कर गुजर जाने की तमन्ना लिए निकले हैं इन सफरों, जहां उम्मीद और विश्वास दोनों कायम हैं जो अर्जुन के भांति लक्ष्य को भेद देंगे । मुझे अभी अपने जीवन में बहुत कुछ करना है किसी के सपनों को पूरा करना हैं । अब तो बस मेरा एक ही लक्ष्य हैं कि मैं बस उसके सपने पूरें करू।

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