जयपुर में सांप्रदायिक झड़प के बाद इंटरनेट बंद

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श्रद्धालुओं को ले जा रही एक बस पर जयपुर में हमला होने के बाद दो गुटों की आपस में झड़प हो गई, जिसके बाद क्षेत्र में मोबाइल इंटरनेट सेवाओं को 24 घंटे के लिए निलंबित कर दिया गया है। पुलिस आयुक्त आनंद श्रीवास्तव के अनुसार, सोमवार रात को दिल्ली रोड पर गलता गेट के सामने हरिद्वार जा रही एक बस पर कुछ लोगों द्वारा पथराव किया गया, जिसमें 12 लोग घायल हो गए। इसके बाद ईदगाह रोड पर दो समुदायों के बीच सांप्रदायिक झड़प हो गई।

इस घटनाक्रम के दौरान कुछ पुलिसकर्मी भी घायल हो गए, जिसके बाद पुलिस ने भीड़ को तितर-बितर करने के लिए आंसू गैस और बल का प्रयोग किया।

श्रीवास्तव ने कहा कि इंटरनेट सेवाओं को 24 घंटे के लिए निलंबित कर दिया गया है और राम गुंज, ट्रांसपोर्ट नगर और गलता गेट क्षेत्रों में एहतियात के तौर पर भारी पुलिस बल तैनात किया गया है।

इस मामले में पुलिस ने 25 से 30 लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया है, लेकिन अभी तक कोई गिरफ्तारी नहीं हुई है।

न्यूज स्त्रोत आईएएनएस


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बहुत ही मुश्किल है अपने बारे में लिखना । इसलिए ज्यादा कुछ नहीं, मैं बहुत ही सरल व्यतित्व का व्यक्ति हूं । खुशमिजाज हूं ए इसलिए चेहरे पर हमेशा खुशी रहती हैए और मुझे अकेला रहना ज्यादा पंसद है। मेरा स्वभाव है कि मेरी बजह से किसी का कोई नुकसान नहीं होना चाहिए और ना ही किसी का दिल दुखना चाहिए। चाहे वो व्यक्ति अच्छा हो या बुरा। मेरे इस स्वभाव के कारण कभी कभी मुझे खामियाजा भी भुगतान पड़ता है। मैं अक्सर उनके बारे में सोचकर भुला देता हूं क्योंकि खुश रहने का हुनर सिर्फ मेरे पास है। मेरी अपनी विचारए विचारधारा है जिसे में अभिव्यक्त करता रहता हूं । जिन लोगों के विचारों से कभी प्रभावित भी होता हूं तो उन्हें फोलो कर लेता हूं । अभी सफर की शुरुआत है मैने कंप्यूटर ऑफ माटर्स की डिग्री हासिल की है और इस मीडीया क्षेत्र में अभी नया हूं। मगर मुझे अब इस क्षेत्र में काम करना अच्छा लग रहा है। और फिर इसी में काम करने का मन बना लेना दूसरों के लिये अश्चर्य पूर्ण होगा। लेकिन इससे पहले और आज भी ब्लागर ने एक मंच दिया चिठ्ठा के रुप में, जहां बिना रोक टोक के आसानी से सबकुछ लिखा या बताया जा सका। कभी कभी मन में उठ रही बातों या भावों को शब्दों में पिरोयाए उनमें खुद की और दूसरों की कहानी कही। कभी उनके द्वारा किसी को पुकाराए तो कभी खुद ही रूठ गया। कई बार लिखने पर भी मन सतुष्ट नहीं हुआ और निरंतर कुछ नया लिखने मन बनता रहता है। अजीब सी बेचैनी जो न जाने क्या करवाएगी और कितना कुछ कर गुजर जाने की तमन्ना लिए निकले हैं इन सफरों, जहां उम्मीद और विश्वास दोनों कायम हैं जो अर्जुन के भांति लक्ष्य को भेद देंगे । मुझे अभी अपने जीवन में बहुत कुछ करना है किसी के सपनों को पूरा करना हैं । अब तो बस मेरा एक ही लक्ष्य हैं कि मैं बस उसके सपने पूरें करू।

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