अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष ने बताया,भारत की आर्थिक वृद्धि दर उम्मीद से ज्यादा कमजोर

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जयपुर।इस समय चल रही विश्व व्यापी मंदी के कारण भारत ही नही अपितु कई और देशों की हालत दिन प्रति दिन बिगड़ती जा रही है।इस मंदी के बाद हाल ही अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष ने भारत को लेकर बताया है कि कुछ गैर-बैंक वित्तीय कंपनियों में कॉर्पोरेट और पर्यावरण नियामक अनिश्चितता और इस समय चल रही सुस्त कमजोरी के कारण भारत की आर्थिक वृद्धि उम्मीद से बहुत कमजोर हो गई है।

अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष के प्रवक्ता गेरी राइस ने एक संवाददाता सम्मेलन में कहा है कि, फिर से हमारे पास संख्याओं का एक ताजा सेट होगा, लेकिन भारत में हालिया आर्थिक विकास उम्मीद से बहुत कमजोर हुई है। भारत में मुख्य रूप से कॉर्पोरेट और पर्यावरण नियामक अनिश्चितता और कुछ गैर-बैंक वित्तीय कंपनियों में कमजोर कमजोरी और आउटलुक के जोखिम के कारण हुआ है।क्योंकि हम नकारात्मक पक्ष में झुके हुए है।

उन्होने बताया कि सरकारी आंकड़ों के अनुसार भारत में अप्रैल से जून तिमाही में आर्थिक विकास दर सात साल के निचले स्तर पहुंच चुकी है जो कि अब 5 फीसदी है। अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष ने वित्त वर्ष 2019-20 के लिए घरेलू मांग के लिए ‘कमजोर से अपेक्षित दृष्टिकोण’ के कारण भारत के आर्थिक विकास के लिए इसके प्रक्षेपण को 0.3 प्रतिशत अंक से 7 प्रतिशत तक घटा दिया है।

दूसरी तरफ सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय ने एक बयान जारी कर बताया है कि इस समय इस मंदी का मुख्य कारण विनिर्माण क्षेत्र और कृषि उत्पादन में तेज गिरावट का होना भी है।

वैसे इस विश्वव्यापी मंदी का मुख्य कारण अमेरिका और चीन के बीच चल रहा ट्रेड वार ही है और वैश्विक अशांत भी इसको और बढ़ती है।

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