अंतर्राष्ट्रीय उड़ानें 31 जुलाई तक निलंबित रहेंगी

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नागर विमानन महानिदेशालय (डीजीसीए) ने शुक्रवार को एक परिपत्र जारी कर अंतर्राष्ट्रीय उड़ानों के परिचालन पर लगी रोक को 31 जुलाई तक के लिए बढ़ा दिया। बाहर की उड़ानों को 15 जुलाई तक स्थगित रखने के निर्णय के ठीक एक सप्ताह बाद डीजीसीए का यह फैसला आया है।

नियामक ने कहा कि पहले के परिपत्र की वैधता को 31 जुलाई रात समय 11.59 बजे तक बढ़ा दिया गया है।

परिपत्र में कहा गया, “हालांकि, अंतर्राष्ट्रीय निर्धारित उड़ानों को सक्षम प्राधिकारी द्वारा चयनित मार्गों पर अलग-अलग मामलों के आधार पर अनुमति दी जा सकती है।”

गौरतलब है कि विदेश में फंसे भारतीयों को वंदे भारत मिशन के तहत स्वदेश लाने के लिए कुछ उड़ानों का परिचालन होता रहा है।

पिछले महीने, नागरिक उड्डयन मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने कहा कि अंतर्राष्ट्रीय उड़ान सेवाओं का फिर से शुरू होना, आगमन वाले देश में ‘सीमा स्वीकृति’ मानदंडों और यातायात मांग जैसे कारकों पर निर्भर करेगा।

वर्तमान में, उत्तरी अमेरिका-भारत क्षेत्र में निकासी उड़ानों की अच्छी मांग देखी गई है।

कोविड-19 के कारण देशव्यापी लॉकडाउन के मद्देनजर यात्री हवाई सेवाओं को 25 मार्च को निलंबित कर दिया गया था, हालांकि घरेलू हवाई सेवाओं को 25 मई से चरणबद्ध तरीके से फिर से शुरू किया गया है।

न्यूज स्त्रात आईएएनएस

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बहुत ही मुश्किल है अपने बारे में लिखना । इसलिए ज्यादा कुछ नहीं, मैं बहुत ही सरल व्यतित्व का व्यक्ति हूं । खुशमिजाज हूं ए इसलिए चेहरे पर हमेशा खुशी रहती हैए और मुझे अकेला रहना ज्यादा पंसद है। मेरा स्वभाव है कि मेरी बजह से किसी का कोई नुकसान नहीं होना चाहिए और ना ही किसी का दिल दुखना चाहिए। चाहे वो व्यक्ति अच्छा हो या बुरा। मेरे इस स्वभाव के कारण कभी कभी मुझे खामियाजा भी भुगतान पड़ता है। मैं अक्सर उनके बारे में सोचकर भुला देता हूं क्योंकि खुश रहने का हुनर सिर्फ मेरे पास है। मेरी अपनी विचारए विचारधारा है जिसे में अभिव्यक्त करता रहता हूं । जिन लोगों के विचारों से कभी प्रभावित भी होता हूं तो उन्हें फोलो कर लेता हूं । अभी सफर की शुरुआत है मैने कंप्यूटर ऑफ माटर्स की डिग्री हासिल की है और इस मीडीया क्षेत्र में अभी नया हूं। मगर मुझे अब इस क्षेत्र में काम करना अच्छा लग रहा है। और फिर इसी में काम करने का मन बना लेना दूसरों के लिये अश्चर्य पूर्ण होगा। लेकिन इससे पहले और आज भी ब्लागर ने एक मंच दिया चिठ्ठा के रुप में, जहां बिना रोक टोक के आसानी से सबकुछ लिखा या बताया जा सका। कभी कभी मन में उठ रही बातों या भावों को शब्दों में पिरोयाए उनमें खुद की और दूसरों की कहानी कही। कभी उनके द्वारा किसी को पुकाराए तो कभी खुद ही रूठ गया। कई बार लिखने पर भी मन सतुष्ट नहीं हुआ और निरंतर कुछ नया लिखने मन बनता रहता है। अजीब सी बेचैनी जो न जाने क्या करवाएगी और कितना कुछ कर गुजर जाने की तमन्ना लिए निकले हैं इन सफरों, जहां उम्मीद और विश्वास दोनों कायम हैं जो अर्जुन के भांति लक्ष्य को भेद देंगे । मुझे अभी अपने जीवन में बहुत कुछ करना है किसी के सपनों को पूरा करना हैं । अब तो बस मेरा एक ही लक्ष्य हैं कि मैं बस उसके सपने पूरें करू।

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