छत्तिसगढ़ में खुफिया तंत्र को सक्रिय रखने के निर्देश

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दिल्ली में हुई हिंसा के बाद विभिन्न राज्यों में पुलिस और खुफिया तंत्र को सक्रिय रहने के निर्देश दिए जा रहे हैं। छत्तीसगढ़ के पुलिस महानिदेशक डी.एम. अवस्थी ने बुधवार को वीडियो कान्फ्रेंसिंग कर खुफिया तंत्र को और अधिक सक्रिय करने के निर्देश दिए हैं। आधिकारिक जानकारी के अनुसार, डीजीपी अवस्थी ने राजधानी में पुलिस मुख्यालय में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिये सभी रेंज के पुलिस महानिरीक्षक और जिलों के पुलिस अधीक्षकों की बैठक ली। अवस्थी ने सभी अधिकारियों को राज्य में बेहतर कानून व्यवस्था बनाए रखने के निर्देश दिए।

उन्होंने कहा कि सभी अधिकारी आज ही अपने जिलों में कानून व्यवस्था की समीक्षा करें। किसी भी प्रकार की लापरवाही पाए जाने पर सबंधित के अधिकारी के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। प्रत्येक घटनाओं पर बारीकी से नजर रखें और समीक्षा करें।

उन्होंने मुखबिर तंत्र को और अधिक सक्रिय करने के निर्देश भी दिए। उन्होंने कहा कि मुखबिरों के जरिये प्राप्त सूचनाओं की समीक्षा कर प्रभावी कदम उठाएं।

न्यूज स्त्रोत आईएएनएस

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बहुत ही मुश्किल है अपने बारे में लिखना । इसलिए ज्यादा कुछ नहीं, मैं बहुत ही सरल व्यतित्व का व्यक्ति हूं । खुशमिजाज हूं ए इसलिए चेहरे पर हमेशा खुशी रहती हैए और मुझे अकेला रहना ज्यादा पंसद है। मेरा स्वभाव है कि मेरी बजह से किसी का कोई नुकसान नहीं होना चाहिए और ना ही किसी का दिल दुखना चाहिए। चाहे वो व्यक्ति अच्छा हो या बुरा। मेरे इस स्वभाव के कारण कभी कभी मुझे खामियाजा भी भुगतान पड़ता है। मैं अक्सर उनके बारे में सोचकर भुला देता हूं क्योंकि खुश रहने का हुनर सिर्फ मेरे पास है। मेरी अपनी विचारए विचारधारा है जिसे में अभिव्यक्त करता रहता हूं । जिन लोगों के विचारों से कभी प्रभावित भी होता हूं तो उन्हें फोलो कर लेता हूं । अभी सफर की शुरुआत है मैने कंप्यूटर ऑफ माटर्स की डिग्री हासिल की है और इस मीडीया क्षेत्र में अभी नया हूं। मगर मुझे अब इस क्षेत्र में काम करना अच्छा लग रहा है। और फिर इसी में काम करने का मन बना लेना दूसरों के लिये अश्चर्य पूर्ण होगा। लेकिन इससे पहले और आज भी ब्लागर ने एक मंच दिया चिठ्ठा के रुप में, जहां बिना रोक टोक के आसानी से सबकुछ लिखा या बताया जा सका। कभी कभी मन में उठ रही बातों या भावों को शब्दों में पिरोयाए उनमें खुद की और दूसरों की कहानी कही। कभी उनके द्वारा किसी को पुकाराए तो कभी खुद ही रूठ गया। कई बार लिखने पर भी मन सतुष्ट नहीं हुआ और निरंतर कुछ नया लिखने मन बनता रहता है। अजीब सी बेचैनी जो न जाने क्या करवाएगी और कितना कुछ कर गुजर जाने की तमन्ना लिए निकले हैं इन सफरों, जहां उम्मीद और विश्वास दोनों कायम हैं जो अर्जुन के भांति लक्ष्य को भेद देंगे । मुझे अभी अपने जीवन में बहुत कुछ करना है किसी के सपनों को पूरा करना हैं । अब तो बस मेरा एक ही लक्ष्य हैं कि मैं बस उसके सपने पूरें करू।

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