‘कर्नाटक का नाटक’ कोर्ट रूम में, जानिये क्या हुआ सुप्रीम कोर्ट के अंदर?

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जयपुर। आज सुप्रीम कोर्ट का एक अहम फैसला आया। इस फैसले के बाद अब सबकी निगाहें कल कर्नाटक में होने वाले शक्ति परीक्षण पर टिक गई हैं। सुप्रीम कोर्ट ने भाजपा को आदेश दिया है कि वो कल शाम 4 बजे तक कर्नाटक विधानसभा में बहुमत साबित करके दिखा दे।

सुप्रीम कोर्ट में कांग्रेस-जेडीएस की तरफ से पक्ष रख रहे थे, अभिषेक मनुसिंघवी और भाजपा के तरफ से वकील थे, मुकुल रोहतगी। सुप्रीम कोर्ट के तीन जजों जस्टिस ए के सीकरी , जस्टिस एस के बोबडे और जस्टिस अशोक भूषण ने इस मामले की सुनवाई की है।

कोर्ट में मुकुल रोहतगी ने मांग की थी कि भाजपा को मिले 15 दिनों की मोहलत को घटाया नहीं जाए और नहीं तो इसे कम से कम 7 दिन का किया जाए। इस पर तीन जजों की बेंच ने कहा कि किसी भी हालत में 19 मई की शाम 4 बजे तक भाजपा को विधानसभा में बहुमत साबित करना होगा।

मनुसिंघवी ने जजों से अपील की कि उनके विधायकों को सुरक्षा मुहय्या कराई जाए, जिसपर अदालत ने कर्नाटक के डीजीपी को हर एक विधायक को सुरक्षा प्रदान करने और उन्हें सुरक्षित विधानसभा पहुंचाने का आदेश दिया। कोर्ट ने फ्लोर टेस्ट की वीडियोग्राफी कराने से मना कर दिया।karnataka vidhan sabha file pic

इसके साथ ही कांग्रेस के वकील मनुसिंघवी ने सुप्रीम कोर्ट से ये अपील की कि एंगलो-इंडियन विधायक की नियुक्ति ना होने दी जाए और साथ साथ ही साथ येदियुरप्पा के द्वारा राज्य के लिए कोई भी नीतिगत फैसला ना लिया जाए। कांग्रेस की इन दोनों मांगों को सुप्रीम कोर्ट की बेंच ने स्वीकार कर लिया है।

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