इंफोसिस का मुनाफा 30 फीसदी घटा

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वित्त वर्ष 2018-19 की तीसरी तिमाही में वैश्विक सॉफ्टवेयर दिग्गज इंफोसिस के मुनाफे में 30 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई है, जोकि 3,610 करोड़ रुपये रहा। जबकि एक साल पहले की समान अवधि में यह 5,129 करोड़ रुपये था। बम्बई स्टॉक एक्सचेंज में दाखिल नियामकीय फाइलिंग में आईटी दिग्गज ने कहा कि हालांकि समीक्षाधीन अवधि में कंपनी के राजस्व में साल-दर-साल आधार पर 20.3 फीसदी वृद्धि दर्ज की गई, जो कि 21,400 करोड़ रुपये रहा। जबकि एक साल पहले समान अवधि में यह 17,794 करोड़ रुपये था।

क्रमिक आधार पर भी, कंपनी के मुनाफे में समीक्षाधीन अवधि में 12 फीसदी गिरावट दर्ज की गई, जोकि चालू वित्त वर्ष की दूसरी तिमाही में 4,110 करोड़ रुपये था। वहीं, राजस्व में 3.8 फीसदी तेजी दर्ज की गई, जोकि वित्त वर्ष 2018-19 की दूसरी तिमाही में 20,609 करोड़ रुपये था।

अंतर्राष्ट्रीय वित्तीय रिपोर्टिग मानक (आईआरएफएस) के तहत, कंपनी के मुनाफे में साल-दर-साल आधार पर करीब 37 फीसदी गिरावट दर्ज की गई है, जोकि 50.2 करोड़ डॉलर रहा। जबकि एक साल पहले की तिमाही में यह 79.6 करोड़ डॉलर रहा है। इसके अलावा क्रमिक आधार पर इसमें 13.6 फीसदी गिरावट हुई, जोकि एक तिमाही पहले 58.1 करोड़ डॉलर था।

न्यूज स्त्रोत आईएएनएस


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बहुत ही मुश्किल है अपने बारे में लिखना । इसलिए ज्यादा कुछ नहीं, मैं बहुत ही सरल व्यतित्व का व्यक्ति हूं । खुशमिजाज हूं ए इसलिए चेहरे पर हमेशा खुशी रहती हैए और मुझे अकेला रहना ज्यादा पंसद है। मेरा स्वभाव है कि मेरी बजह से किसी का कोई नुकसान नहीं होना चाहिए और ना ही किसी का दिल दुखना चाहिए। चाहे वो व्यक्ति अच्छा हो या बुरा। मेरे इस स्वभाव के कारण कभी कभी मुझे खामियाजा भी भुगतान पड़ता है। मैं अक्सर उनके बारे में सोचकर भुला देता हूं क्योंकि खुश रहने का हुनर सिर्फ मेरे पास है। मेरी अपनी विचारए विचारधारा है जिसे में अभिव्यक्त करता रहता हूं । जिन लोगों के विचारों से कभी प्रभावित भी होता हूं तो उन्हें फोलो कर लेता हूं । अभी सफर की शुरुआत है मैने कंप्यूटर ऑफ माटर्स की डिग्री हासिल की है और इस मीडीया क्षेत्र में अभी नया हूं। मगर मुझे अब इस क्षेत्र में काम करना अच्छा लग रहा है। और फिर इसी में काम करने का मन बना लेना दूसरों के लिये अश्चर्य पूर्ण होगा। लेकिन इससे पहले और आज भी ब्लागर ने एक मंच दिया चिठ्ठा के रुप में, जहां बिना रोक टोक के आसानी से सबकुछ लिखा या बताया जा सका। कभी कभी मन में उठ रही बातों या भावों को शब्दों में पिरोयाए उनमें खुद की और दूसरों की कहानी कही। कभी उनके द्वारा किसी को पुकाराए तो कभी खुद ही रूठ गया। कई बार लिखने पर भी मन सतुष्ट नहीं हुआ और निरंतर कुछ नया लिखने मन बनता रहता है। अजीब सी बेचैनी जो न जाने क्या करवाएगी और कितना कुछ कर गुजर जाने की तमन्ना लिए निकले हैं इन सफरों, जहां उम्मीद और विश्वास दोनों कायम हैं जो अर्जुन के भांति लक्ष्य को भेद देंगे । मुझे अभी अपने जीवन में बहुत कुछ करना है किसी के सपनों को पूरा करना हैं । अब तो बस मेरा एक ही लक्ष्य हैं कि मैं बस उसके सपने पूरें करू।

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