इंफोसिस के सीओओ प्रवीण राव नैसकॉम के अध्यक्ष बने, रेखा मेनन बनीं उपाध्यक्ष

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नेशनल एसोसिएशन ऑफ सॉफ्टवेयर एंड सर्विसेज कंपनीज (नैसकॉम) ने सोमवार को कहा कि उसने इंफोसिस के मुख्य परिचालन अधिकारी (सीओओ) यू. बी. प्रवीण राव को 2020-21 के लिए अपना अध्यक्ष नियुक्त किया है। वह डब्ल्यूएनएस ग्लोबल सर्विसेज के समूह सीईओ केशव मुरुगेश की जगह लेंगे।

इसके साथ ही नैसकॉम ने एसेंचर्स की भारत में अध्यक्ष और वरिष्ठ प्रबंध निदेशक रेखा एम. मेनन को 2020-21 के लिए उपाध्यक्ष नियुक्त किया है।

इस अवसर पर राव ने कहा कि वह उद्योग की सेवा के लिए तत्पर हैं। राव ने कहा, भारतीय आईटी उद्योग के लिए यह चुनौतीपूर्ण समय है, क्योंकि हम एक अभूतपूर्व स्थिति से निपट रहे हैं।

राव ने कहा कि उद्योग को लचीलापन बनाने, कार्यबल बढ़ाने और भारत की वृद्धि में योगदान देने की दिशा में एक केंद्रित ²ष्टिकोण की आवश्यकता है।

वहीं रेखा मेनन ने कहा, मैं नैसकॉम और उसके नेतृत्व के साथ यह सुनिश्चित करने के लिए काम करने की उत्सुक हूं कि हमारे उद्योग में नवाचार और तेजी बनी रहे, क्योंकि यह नए अवसरों के द्वार खोलता है और चुनौतियों का सामना करने के लिए तैयार करता है।

न्यूज स्त्रोत आईएएनएस

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बहुत ही मुश्किल है अपने बारे में लिखना । इसलिए ज्यादा कुछ नहीं, मैं बहुत ही सरल व्यतित्व का व्यक्ति हूं । खुशमिजाज हूं ए इसलिए चेहरे पर हमेशा खुशी रहती हैए और मुझे अकेला रहना ज्यादा पंसद है। मेरा स्वभाव है कि मेरी बजह से किसी का कोई नुकसान नहीं होना चाहिए और ना ही किसी का दिल दुखना चाहिए। चाहे वो व्यक्ति अच्छा हो या बुरा। मेरे इस स्वभाव के कारण कभी कभी मुझे खामियाजा भी भुगतान पड़ता है। मैं अक्सर उनके बारे में सोचकर भुला देता हूं क्योंकि खुश रहने का हुनर सिर्फ मेरे पास है। मेरी अपनी विचारए विचारधारा है जिसे में अभिव्यक्त करता रहता हूं । जिन लोगों के विचारों से कभी प्रभावित भी होता हूं तो उन्हें फोलो कर लेता हूं । अभी सफर की शुरुआत है मैने कंप्यूटर ऑफ माटर्स की डिग्री हासिल की है और इस मीडीया क्षेत्र में अभी नया हूं। मगर मुझे अब इस क्षेत्र में काम करना अच्छा लग रहा है। और फिर इसी में काम करने का मन बना लेना दूसरों के लिये अश्चर्य पूर्ण होगा। लेकिन इससे पहले और आज भी ब्लागर ने एक मंच दिया चिठ्ठा के रुप में, जहां बिना रोक टोक के आसानी से सबकुछ लिखा या बताया जा सका। कभी कभी मन में उठ रही बातों या भावों को शब्दों में पिरोयाए उनमें खुद की और दूसरों की कहानी कही। कभी उनके द्वारा किसी को पुकाराए तो कभी खुद ही रूठ गया। कई बार लिखने पर भी मन सतुष्ट नहीं हुआ और निरंतर कुछ नया लिखने मन बनता रहता है। अजीब सी बेचैनी जो न जाने क्या करवाएगी और कितना कुछ कर गुजर जाने की तमन्ना लिए निकले हैं इन सफरों, जहां उम्मीद और विश्वास दोनों कायम हैं जो अर्जुन के भांति लक्ष्य को भेद देंगे । मुझे अभी अपने जीवन में बहुत कुछ करना है किसी के सपनों को पूरा करना हैं । अब तो बस मेरा एक ही लक्ष्य हैं कि मैं बस उसके सपने पूरें करू।

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