‘द एक्सीडेंटल प्राइम मिनिस्टर’ पर इंदौर में हंगामा

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पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के सलाहकार संजय बारु द्वारा लिखी पुस्तक पर बनाई गई फिल्म ‘द एक्सीडेंटल प्राइम मिनिस्टर’ शुक्रवार को रिलीज हुई। इस फिल्म के रिलीज होने के दौरान इंदौर व जबलपुर में काफी हंगामा हुआ, वहीं ग्वालियर में भारी सुरक्षा के बीच फिल्म का प्रदर्शन हुआ। तमाम विवादों के बाद शुक्रवार को आखिरकार ‘द एक्सीडेंटल प्राइम मिनिस्टर’ रिलीज हो गई। इंदौर में इस फिल्म को मल्हार मेगा मॉल में देखने बड़ी संख्या में भाजयुमों के कार्यकर्ता पहुंचे। जहां पुलिस और भाजयुमो कार्यकर्ताओं के बीच बहस हुई। आखिरकार कई कार्यकर्ताओं को फिल्म देखने जाने दिया गया।

इसी तरह ग्वालियर में भी सुरक्षा के बीच फिल्म रिलीज हुई। इस फिल्म को देखने लोग पहुंचे। पुलिस बल की तैनाती की गई थी, ताकि किसी तरह का विवाद न हो। जबलपुर के समदड़िया मॉल में भी फिल्म प्रदर्शन को लेकर हंगामा हुआ।

इस फिल्म को लेकर जनसंपर्क मंत्री पी.सी. शर्मा ने संवाददाताओं से चर्चा करते हुए कहा कि वास्तव में तो एक्सीडेंटल प्राइम मिनिस्टर नरेंद्र मोदी हैं, जो अगले वर्ष 2019 में बाहर हो जाएंगे। मनमोहन सिंह को तो सांसदों ने प्रधानमंत्री के तौर पर चुना था।

न्यूज स्त्रोत आईएएनएस


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बहुत ही मुश्किल है अपने बारे में लिखना । इसलिए ज्यादा कुछ नहीं, मैं बहुत ही सरल व्यतित्व का व्यक्ति हूं । खुशमिजाज हूं ए इसलिए चेहरे पर हमेशा खुशी रहती हैए और मुझे अकेला रहना ज्यादा पंसद है। मेरा स्वभाव है कि मेरी बजह से किसी का कोई नुकसान नहीं होना चाहिए और ना ही किसी का दिल दुखना चाहिए। चाहे वो व्यक्ति अच्छा हो या बुरा। मेरे इस स्वभाव के कारण कभी कभी मुझे खामियाजा भी भुगतान पड़ता है। मैं अक्सर उनके बारे में सोचकर भुला देता हूं क्योंकि खुश रहने का हुनर सिर्फ मेरे पास है। मेरी अपनी विचारए विचारधारा है जिसे में अभिव्यक्त करता रहता हूं । जिन लोगों के विचारों से कभी प्रभावित भी होता हूं तो उन्हें फोलो कर लेता हूं । अभी सफर की शुरुआत है मैने कंप्यूटर ऑफ माटर्स की डिग्री हासिल की है और इस मीडीया क्षेत्र में अभी नया हूं। मगर मुझे अब इस क्षेत्र में काम करना अच्छा लग रहा है। और फिर इसी में काम करने का मन बना लेना दूसरों के लिये अश्चर्य पूर्ण होगा। लेकिन इससे पहले और आज भी ब्लागर ने एक मंच दिया चिठ्ठा के रुप में, जहां बिना रोक टोक के आसानी से सबकुछ लिखा या बताया जा सका। कभी कभी मन में उठ रही बातों या भावों को शब्दों में पिरोयाए उनमें खुद की और दूसरों की कहानी कही। कभी उनके द्वारा किसी को पुकाराए तो कभी खुद ही रूठ गया। कई बार लिखने पर भी मन सतुष्ट नहीं हुआ और निरंतर कुछ नया लिखने मन बनता रहता है। अजीब सी बेचैनी जो न जाने क्या करवाएगी और कितना कुछ कर गुजर जाने की तमन्ना लिए निकले हैं इन सफरों, जहां उम्मीद और विश्वास दोनों कायम हैं जो अर्जुन के भांति लक्ष्य को भेद देंगे । मुझे अभी अपने जीवन में बहुत कुछ करना है किसी के सपनों को पूरा करना हैं । अब तो बस मेरा एक ही लक्ष्य हैं कि मैं बस उसके सपने पूरें करू।

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