भारत का मौसम, बारिश और कृषि उत्पादन

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भारतीय किसानों का एक बड़ा हिस्सा अभी भी कृषि गतिविधियों को करने के लिए वर्षा पर निर्भर करता है। कृषि से भारतीय अर्थव्यवस्था पर अप्रत्यक्ष प्रभाव पड़ता हैं। भारत में उष्णकटिबंधीय मानसून का मौसम हैं, गर्मियों के महीनों में तापमान बहुत अधिक होता है और बारिश भी ज्यादा होती हैं।

गर्मियों के महीनों में उच्च तापमान और भारी वर्षा, भारत के विभिन्न हिस्सों में विभिन्न प्रकार की खरीफ फसलों के विकास के लिए महत्वपूर्ण है। अन्य देशों के विपरीत, भारत सर्दियों के महीनों के दौरान भी धूप के लंबे घंटों का आनंद लेता है।

चावल, जूट, गन्ना, आदि जैसी फसलों को उनकी खेती के लिए उच्च तापमान और भारी वर्षा की आवश्यकता होती है। इन फसलों कि गर्मियों में खेती की जाती है। गेहूं, जौ आदि जैसी फसलों में मध्यम तापमान और वर्षा की आवश्यकता होती है, इनकी सर्दी में खेती की जाती है।

रबड़ के पेड़ों को साल भर समान तापमान और नियमित वर्षा की आवश्यकता होती है। दक्कन के दक्षिणी भागों में रबड़ उगाया जाता है। दक्कन के दक्षिणी हिस्सों में, तापमान साल भर काफी अधिक होता है और वर्षा 6 से 8 महीने होती हैं।

पर्याप्त कृषि उत्पादन के लिए सामान्य वर्षा आवश्यक है, खाद्य मुद्रास्फीति पूरे देश को अस्थिर कर सकती है। खाद्य कीमत कृषि उत्पादन पर निर्भर करती है।

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