देश का वनस्पति तेल आयात अप्रैल में 11 फीसदी घटा

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भारत का वनस्पति तेल (खाद्य व अखाद्य तेल) आयात बीते महीने अप्रैल में पिछले साल के मुकाबले 11 फीसदी घट गया है, लेकिन पिछले छह महीने के दौरान आयात में तीन फीसदी का इजाफा हुआ है।

साल्वेंट एक्सट्रैक्टर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया ने बुधवार को बताया कि अप्रैल 2019 में भारत ने कुल 12,32,283

वनस्पति तेल का आयात किया जिसमें 11,98,763 टन खाद्य तेल और 33,520 अखाद्य तेल शामिल है, जबकि पिछले साल अप्रैल में भारत ने 13, 86,466 वनस्पति तेल का आयात किया था जिसमें 13,68,616 टन खाद्य तेल और 17,850 टन अखाद्य तेल शामिल था।

तेल-तिलहन वर्ष 2018-19 (नवंबर-अक्टूबर) के पहले छह महीने में यानी नवंबर से लेकर अप्रैल तक भारत ने 75,41,689 वनस्पति तेल का आयात किया जोकि पिछले वर्ष की समान अवधि के 73,18,295 टन के मुकाबले तीन फीसदी अधिक है।

न्यूज स्त्रोत आईएएनएस


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बहुत ही मुश्किल है अपने बारे में लिखना । इसलिए ज्यादा कुछ नहीं, मैं बहुत ही सरल व्यतित्व का व्यक्ति हूं । खुशमिजाज हूं ए इसलिए चेहरे पर हमेशा खुशी रहती हैए और मुझे अकेला रहना ज्यादा पंसद है। मेरा स्वभाव है कि मेरी बजह से किसी का कोई नुकसान नहीं होना चाहिए और ना ही किसी का दिल दुखना चाहिए। चाहे वो व्यक्ति अच्छा हो या बुरा। मेरे इस स्वभाव के कारण कभी कभी मुझे खामियाजा भी भुगतान पड़ता है। मैं अक्सर उनके बारे में सोचकर भुला देता हूं क्योंकि खुश रहने का हुनर सिर्फ मेरे पास है। मेरी अपनी विचारए विचारधारा है जिसे में अभिव्यक्त करता रहता हूं । जिन लोगों के विचारों से कभी प्रभावित भी होता हूं तो उन्हें फोलो कर लेता हूं । अभी सफर की शुरुआत है मैने कंप्यूटर ऑफ माटर्स की डिग्री हासिल की है और इस मीडीया क्षेत्र में अभी नया हूं। मगर मुझे अब इस क्षेत्र में काम करना अच्छा लग रहा है। और फिर इसी में काम करने का मन बना लेना दूसरों के लिये अश्चर्य पूर्ण होगा। लेकिन इससे पहले और आज भी ब्लागर ने एक मंच दिया चिठ्ठा के रुप में, जहां बिना रोक टोक के आसानी से सबकुछ लिखा या बताया जा सका। कभी कभी मन में उठ रही बातों या भावों को शब्दों में पिरोयाए उनमें खुद की और दूसरों की कहानी कही। कभी उनके द्वारा किसी को पुकाराए तो कभी खुद ही रूठ गया। कई बार लिखने पर भी मन सतुष्ट नहीं हुआ और निरंतर कुछ नया लिखने मन बनता रहता है। अजीब सी बेचैनी जो न जाने क्या करवाएगी और कितना कुछ कर गुजर जाने की तमन्ना लिए निकले हैं इन सफरों, जहां उम्मीद और विश्वास दोनों कायम हैं जो अर्जुन के भांति लक्ष्य को भेद देंगे । मुझे अभी अपने जीवन में बहुत कुछ करना है किसी के सपनों को पूरा करना हैं । अब तो बस मेरा एक ही लक्ष्य हैं कि मैं बस उसके सपने पूरें करू।

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