बदल गयी है भारत की परमाणु नीति?

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जयपुर। भारत की परमाणु नीति बदल गई है अब यह सवाल खड़ा हो चुका है क्योंकि अब भारत के नेताओं द्वारा यह बात धीरे-धीरे सामने करी जा रही है कि अब भारत की परमाणु नीति नो फर्स्ट यूज पर पुनः विचार करेंगे.

आपको याद होगा कि मोदी सरकार के पहले कार्यकाल में रक्षा मंत्रालय संभाल रहे मनोहर पारिकर ने भी यह बात कही थी और उन्होंने कहा था कि भारत को अपने नो फर्स्ट पॉलिसी पर विचार करना चाहिए इसके अलावा उन्होंने कहा था कि वह इस पर और इसका समर्थन नहीं करते हैं इसके अलावा आपको बता दें उस वक्त रक्षा मंत्रालय के प्रवक्ता द्वारा उनके इस बयान को लक करते हुए कहा गया था कि यह उनकी निजी राय है और भारतीय सरकार एवं भारतीय रक्षा मंत्रालय इस बात पर कोई विचार नहीं करता है.

लेकिन जम्मू-कश्मीर से धारा 370 हटाने के बाद एक बार फिर परमाणु बम को लेकर बात करी गई है और इस बार सरकार के बोल कुछ अलग नजर आ रहे हैं क्योंकि इस बार राजनाथ सिंह ने यह बात फिर से दोहराई है लेकिन रक्षा मंत्रालय द्वारा इसका कोई भी खंडन अभी तक नहीं करा गया है.

 

आपको बता दें कि परमाणु नीति का बदलना भारत के लिए ही नहीं बल्कि पूरे विश्व के लिए एक गलत संदेश देना ही है आपको बता दें कि परमाणु बम का इस्तेमाल देश को नुकसान पहुंचाएगा हो सकता है कि अगर पाकिस्तान द्वारा कभी परमाणु इस्तेमाल कर आ जाए और यह कभी हमारे द्वारा प्रमाण इस्तेमाल किया जाए और उसके बाद हम पाकिस्तान का नामोनिशान मिटा दें लेकिन इसका असर भारतीयों पर भी होगा और यह असर लंबे समय तक रहने वाला है.

और परमाणु के अलावा भी अगर जन की बात करी जाए तो यह भारत के लिए और देश के लिए एक गलत रहा होगी क्योंकि जंग सिर्फ देश की अर्थव्यवस्था को नीचे गिर आता है रोजगारी को कम करता है बेरोजगारी बढ़ाता है लोगों के बीच में असंतोष का माहौल पैदा करता है और यह माहौल किसी भी देश के लिए अच्छा नहीं है.

 

आपको बता दें कि अटल बिहारी बाजपेई ने जब परमाणु का पोखरण में परीक्षण किया था उसके बाद से ही सरकार इस बात पर अडिग रही है कि वह कभी भी इसका पहले इस्तेमाल नहीं करेगी और वह उसी स्थितियों में इसका इस्तेमाल करेगी जब उसके यहां पर स्थिति को नियंत्रण में करना मुश्किल होगा और उसके वजूद पर बात आएगी.

 

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