India’s forex reserves में 5 अरब डॉलर की बढ़ोतरी

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देश के फॉरेक्स रिजर्व में बड़ी वृद्धि दर्ज की गई है। भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के आंकड़ों के मुताबिक, नौ अक्टूबर को समाप्त में यह 5.867 अरब डॉलर के उछाल के साथ 551.505 अरब डॉलर पर पहुंच गया है। भारत के फॉरेक्स रिजर्व में विदेशी मुद्रा संपत्ति (एफसीए), स्वर्ण भंडार, विशेष आहरण अधिकार (एसडीआर) और अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) के साथ देश की आरक्षित स्थिति (रिजर्व पॉजिशन) शामिल होती है।

विदेशी मुद्रा संपत्ति (फॉरेन करेंसी असेट्स) में भारी उछाल के कारण फॉरेक्स रिजर्व में बढ़ोतरी हुई है। नौ अक्टूबर को समाप्त में फॉरेन करेंसी असेट्स 5.737 अरब डॉलर बढ़कर 508.783 अरब डॉलर पर पहुंच गया।

इसी तरह, देश के सोने के भंडार में भी वृद्धि हुई। यह 11.3 करोड़ डॉलर बढ़कर 36.598 अरब डॉलर तक पहुंच गया है।

इसके अलावा आईएमएफ में देश का एसडीआर 40 लाख डॉलर बढ़कर 1.480 अरब डॉलर हो गया है। वहीं आईएमएफ में देश का रिजर्व पोजिशन भी 1.3 करोड़ डॉलर बढ़कर 4.644 अरब डॉलर पर पहुंच गया है।

न्यज स्त्रोत आईएएनएस

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बहुत ही मुश्किल है अपने बारे में लिखना । इसलिए ज्यादा कुछ नहीं, मैं बहुत ही सरल व्यतित्व का व्यक्ति हूं । खुशमिजाज हूं ए इसलिए चेहरे पर हमेशा खुशी रहती हैए और मुझे अकेला रहना ज्यादा पंसद है। मेरा स्वभाव है कि मेरी बजह से किसी का कोई नुकसान नहीं होना चाहिए और ना ही किसी का दिल दुखना चाहिए। चाहे वो व्यक्ति अच्छा हो या बुरा। मेरे इस स्वभाव के कारण कभी कभी मुझे खामियाजा भी भुगतान पड़ता है। मैं अक्सर उनके बारे में सोचकर भुला देता हूं क्योंकि खुश रहने का हुनर सिर्फ मेरे पास है। मेरी अपनी विचारए विचारधारा है जिसे में अभिव्यक्त करता रहता हूं । जिन लोगों के विचारों से कभी प्रभावित भी होता हूं तो उन्हें फोलो कर लेता हूं । अभी सफर की शुरुआत है मैने कंप्यूटर ऑफ माटर्स की डिग्री हासिल की है और इस मीडीया क्षेत्र में अभी नया हूं। मगर मुझे अब इस क्षेत्र में काम करना अच्छा लग रहा है। और फिर इसी में काम करने का मन बना लेना दूसरों के लिये अश्चर्य पूर्ण होगा। लेकिन इससे पहले और आज भी ब्लागर ने एक मंच दिया चिठ्ठा के रुप में, जहां बिना रोक टोक के आसानी से सबकुछ लिखा या बताया जा सका। कभी कभी मन में उठ रही बातों या भावों को शब्दों में पिरोयाए उनमें खुद की और दूसरों की कहानी कही। कभी उनके द्वारा किसी को पुकाराए तो कभी खुद ही रूठ गया। कई बार लिखने पर भी मन सतुष्ट नहीं हुआ और निरंतर कुछ नया लिखने मन बनता रहता है। अजीब सी बेचैनी जो न जाने क्या करवाएगी और कितना कुछ कर गुजर जाने की तमन्ना लिए निकले हैं इन सफरों, जहां उम्मीद और विश्वास दोनों कायम हैं जो अर्जुन के भांति लक्ष्य को भेद देंगे । मुझे अभी अपने जीवन में बहुत कुछ करना है किसी के सपनों को पूरा करना हैं । अब तो बस मेरा एक ही लक्ष्य हैं कि मैं बस उसके सपने पूरें करू।

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